सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई शुरू न होने पर ग्यारह साल कैद काट चुके उम्रकैदी को दी जमानत, दी थी यह दलील

सुप्रीम कोर्ट ने साढ़े ग्यारह साल जेल काट चुके उम्रकैदी की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू न होने को देखते हुए उसे जमानत दे दी है। जानें याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगते हुए क्‍या दी थी दलील...

Krishna Bihari SinghPublish: Sun, 23 Jan 2022 07:41 PM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 02:47 AM (IST)
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट में अपील पर सुनवाई शुरू न होने पर ग्यारह साल कैद काट चुके उम्रकैदी को दी जमानत, दी थी यह दलील

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने साढ़े ग्यारह साल जेल काट चुके उम्रकैदी की अपील पर हाई कोर्ट में सुनवाई शुरू नहीं होने को देखते हुए उसे जमानत दे दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि अभियुक्त को ट्रायल कोर्ट की संतुष्टि की शर्ते पूरी करने पर जमानत दी जाती है। जमानत की अन्य शर्तो के साथ ही अभियुक्त प्रत्येक माह के पहले सोमवार को स्थानीय थाने में रिपोर्ट करेगा। इस मामले में अभियुक्त अवधेश ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगते हुए अपराध के वक्त किशोर होने का दावा किया था।

किशोर माने जाने का दिया आधार

अवधेश को सत्र अदालत ने हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके खिलाफ उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर रखी है, जिस पर अभी तक सुनवाई शुरू नहीं हुई है। इस बीच अभियुक्त साढ़े ग्यारह साल कैद काट चुका है।

याचिका का निस्‍तारण किया

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और एमएम सुंद्रेश की पीठ ने अभियुक्त के वकील ऋषि मल्होत्रा की दलीलें सुनने के बाद शुक्रवार को जमानत देते हुए याचिका निपटा दी। इससे पहले मल्होत्रा ने अभियुक्त को जमानत दिए जाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि वह 26 फरवरी, 2010 को अपराध के वक्त किशोर था। जुविनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने आदेश में अभियुक्त को घटना के समय किशोर माना है।

साढ़े ग्यारह साल काट चुका है कैद

कानून के मुताबिक, किशोर को अधिकतम तीन वर्ष के कारावास की सजा हो सकती है, जबकि इस मामले में अभियुक्त साढ़े ग्यारह साल कारावास काट चुका है। मल्होत्रा ने कहा कि हाई कोर्ट ने यह कह कर जमानत देने से मना कर दिया कि अभियुक्त को दूसरे मामले गैंगस्टर एक्ट में किशोर घोषित किया गया है। वह तीन साल से बहुत ज्यादा सजा भुगत चुका है। ऐसे में कोर्ट उसे तत्काल जमानत पर रिहा करने का आदेश दे।

क्या है मामला

याचिकाकर्ता अवधेश और उसके दो साथियों के खिलाफ 26 फरवरी, 2010 को गौतमबुद्ध नगर के सूरजपुर में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इस मुकदमे के कारण 2010 में ही पुलिस ने अवधेश के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में भी सूरजपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया। जनवरी 2014 को ट्रायल कोर्ट ने अवधेश और उसके दो साथियों को हत्या के जुर्म में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके खिलाफ अभियुक्त ने 2014 में ही हाई कोर्ट में अपील की।

जमानत अर्जी कर दी थी खारिज

2016 में अभियुक्त ने हाई कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया। दिसंबर 2017 में अवधेश की मां ने गैंगस्टर एक्ट मामले में गौतमबुद्ध नगर के स्पेशल जज के समक्ष अर्जी दाखिल कर घटना के समय उसके किशोर होने का दावा किया। अर्जी में कहा गया कि अवधेश की जन्मतिथि 21 मई, 1995 है। हत्या के आरोप का मुख्य मामला 26 फरवरी, 2010 का है। कोर्ट ने मामला जुविनाइल जस्टिस बोर्ड को भेज दिया। बोर्ड ने मामले की जांच करने के बाद 20 अप्रैल, 2018 को अवधेश को घटना के वक्त किशोर घोषित किया।  

Edited By Krishna Bihari Singh

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