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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने सलमान खुर्शीद की ट्रिपल तलाक पर किताब लांच की

किताब में इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे के कारण को विस्तार से बताया गया है।

Srishti VermaFri, 09 Mar 2018 02:40 PM (IST)
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने सलमान खुर्शीद की ट्रिपल तलाक पर किताब लांच की

नई दिल्ली (एएनआई)। लंदन की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय प्रेस ने सलमान खुर्शीद की नई किताब 'ट्रिपल तलाक: एक्जामिनिंग फेथ' को गुरुवार को नई दिल्ली में लांच किया। भारतीय सुप्रीम कोर्ट में पिछले कुछ समय में सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा ट्रिपल तलाक और उस पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले पर किताब में बात की गई है। किताब में इस गंभीर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पीछे के कारण को विस्तार से बताया गया है। बुक लांच के अवसर पर सलमान खुर्शीद के अलावा पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग, पूर्व सीजेआई अजीज मुशब्बर अहमदी, एनसी प्रमुख फारुक अब्दुल्ला, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम और मणि शंकर अय्यर उपस्थित थे।

ट्रिपल तलाक मुस्लिम देशों में सबसे अधिक बहस का मुद्दा है। पुरातनत काल से मुस्लिम पुरुषों के चित्रण ने मुस्लिम धर्म के विश्वास को धूमिल कर दिया है। पत्नी को तलाक देने के अधिकारों का हनन और दुरुपयोग किया गया है। आपको बता दें कि, शायरा बानो के मामले में ऐतिहासिक फैसले में शीर्ष अदालत ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक घोषित कर दिया।

सलमान खुर्शीद ने अपनी किताब में इस मुद्दे पर सभी पक्षों को रखा है। कोर्ट के फैसले के कारणों की व्याख्या करते हुए इसमें इस समस्या के अन्य पहलुओं को भी दिखाया है मसलन.. यह क्यों गलत है, क्यों इसके खिलाफ फैसला आया, इस मुद्दे का न्यायिक इतिहास क्या है, कुरान और मुस्लिम धार्मिक नेता इस बारे में क्या कहते हैं, अन्य दूसरे देशों में क्या प्रचलन है आदि।  यह पुस्तक केवल धर्मज्ञानियों के लिए ही नहीं बल्कि सामान्य पाठक के लिए भी उपयोगी है।

सलमान खुर्शीद सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे भारत सरकार में पूर्व विदेश मंत्रालय, कानून और न्याय और व्यापार मामलों का पदभार संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे एक जाने माने लेखक हैं साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य भी हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का एक विभाग है। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रेस है जिसकी दुनिया भर में उपस्थिति है। यह दुनिया के कई देशों में 40 से अधिक भाषाओं में प्रिंट और डिजिटल माध्यम में प्रकाशन करता है। 1912 में स्थापित ओयूपी दुनिया के सबसे बड़े प्रकाशन हाउस के रुप में उभर कर आया है। भारत के पड़ोसी देशों नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में इसकी उपस्थिति है।

Edited By Srishti Verma