पिछले 21 माह में 1.47 लाख बच्चों ने माता या पिता या दोनों को खोया, एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट को हलफनामा दाखिल कर दी जानकारी

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बताया कि अप्रैल 2020 के बाद से करीब 147492 ने अपने अभिवावकों को खो दिया है। सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराते हुए आयोग के तरफ से ये आंकड़े जारी किए गए हैं।

Amit SinghPublish: Sun, 16 Jan 2022 03:54 PM (IST)Updated: Sun, 16 Jan 2022 11:08 PM (IST)
पिछले 21 माह में 1.47 लाख बच्चों ने माता या पिता या दोनों को खोया, एनसीपीसीआर ने सुप्रीम कोर्ट को हलफनामा दाखिल कर दी जानकारी

नई दिल्ली, एजेंसी: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने बताया कि अप्रैल, 2020 के बाद से करीब 1,47,492 ने अपने अभिवावकों को खो दिया है। सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराते हुए आयोग के तरफ से ये आंकड़े जारी किए गए हैं। आयोग के मुताबिक बच्चों ने कोरोना महामारी या फिर किसी अन्य कारण के अपनी मां या माता-पिता दोनों को खो दिया है।

बाल स्वराज पोर्टल-COVID केयर पर आधारिक आंकड़े

NCPCR के मुताबिक उनके आंकड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 11 जनवरी तक अपने 'बाल स्वराज पोर्टल-COVID केयर' पर अपलोड किए गए आंकड़ों पर आधारित हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान अभिवावकों को खोने के कारण देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों को लेकर आयोग ने ये आंकड़े जारी किए हैं। अधिवक्ता स्वरूपमा चतुर्वेदी के माध्यम से दायर हलफनामे में कहा गया है कि राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा 'बाल स्वराज पोर्टल-कोविड केयर' पर अपलोड किए गए डेटा में दोनों श्रेणियों के बच्चे शामिल हैं। जिसमें बच्चे ने माता-पिता या दोनों को COVID-19 संक्रमण या किसी अन्य कारण के चलते खो दिया है। आयोग के मुताबिक 11 जनवरी तक अपलोड किए गए डेटा के अनुसार देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों के आंकड़े निम्न हैं।

अनाथ बच्चे कुल 10,094
माता-पिता, एक की मौत कुल 1,36,910
लावारिस बच्चे कुल 488

लिंग के आधार पर आयोग के आंकड़े

वहीं, लिंग के आधार पर वर्गीक्रत करते हुए आयोग ने बताया कि 1,47,492 बच्चों में से, 76,508 लड़के, 70,980 लड़कियां और चार ट्रांसजेंडर हैं। साथ ही बताया गया है कि ज्यादातर बच्चों की उम्र आठ से 13 साल की है (59,010)। जिसके बाद 14 से 15 वर्ष (22,763) और 16 से 18 वर्ष (22,626) और चार से सात साल के (26,080)बच्चे हैं। आयोग ने बच्चों के आश्रय की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी दी है। आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर बच्चे अपने एकल माता-पिता के साथ रह रहे हैं। जिनकी संख्या कुल 1,25,205 है। वहीं 11,272 बच्चे परिवार के सदस्यों के साथ हैं, इसके बाद 8,450 बच्चे संरक्षकों के साथ रह रहे हैं। साथ ही बताया गया है कि कुल 1,529 बच्चे बाल गृहों में, 19 खुले आश्रय गृहों में, दो अवलोकन गृहों में, 188 अनाथालयों में, 66 विशेष गोद लेने वाली एजेंसियों में और 39 छात्रावासों में हैं।

ओडिशा में सबसे ज्यादा बच्चे हुए प्रभावित

अप्रैल 2020 से COVID और अन्य कारणों से अपने माता या पिता या माता-पिता दोनों को खोने वाले बच्चों का राज्य-वार विवरण देते हुए, आयोग ने कहा कि ऐसे बच्चों की अधिकतम संख्या ओडिशा (24,405) से है। इसके बाद महाराष्ट्र (19,623) है, फिर गुजरात (14,770), तमिलनाडु (11,014), उत्तर प्रदेश (9,247), आंध्र प्रदेश (8,760), मध्य प्रदेश (7,340), पश्चिम बंगाल (6,835) दिल्ली (6,629) और राजस्थान (6,827) हैं।

बच्चों के हितों के लिए हर संभव कोशिश जारी

आयोग ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है कि महामारी में बच्चे प्रभावित न हों या कम प्रतिकूल रूप से प्रभावित हों। इस संदर्भ में, एनसीपीसीआर प्रत्येक राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए राज्य आयोगों के साथ आभासी बैठकें आयोजित कर रहा है। ताकि COVID महामारी की तीसरी लहर की स्थिति में तैयारियों की अद्यतन स्थिति का पता चल सके। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया किया कि वह प्रत्येक राज्य / केंद्रशासित प्रदेश के एससीपीसीआर के साथ क्षेत्रवार बैठकें कर रहा है। उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ एक आभासी बैठक 19 जनवरी को होने वाली है।

Edited By Amit Singh

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