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महामारी के मुश्‍किल दौर में लोगों की मददगार सलोनी को सोशल लीडर ऑफ द ईयर का सम्‍मान

सोशल लीडर ऑफ द ईयर के अवार्ड से सम्‍मानित होने वाली सलोनी भारद्वाज इस महामारी कोविड-19 के मुश्‍किल दौर में बेबस लोगों के लिए मददगार बन कर आई हैं। उनका फाउंडेशन लोटस पेटल प्रत्‍येक जरूरतमंद को हर संभव सहायता देने में जुटा है।

Monika MinalSat, 12 Dec 2020 10:37 AM (IST)
महामारी के मुश्‍किल दौर में लोगों की मददगार सलोनी को सोशल लीडर ऑफ द ईयर का सम्‍मान

 नई दिल्‍ली, जेएनएन। महामारी कोविड-19 के कारण पैदा मुश्‍किल हालात से जूझ रहे लोगों के लिए जहां हर कदम पर एक नई परेशानी मुंह बाए खड़ी है वहीं मदद  के लिए लोटस पेटल (Lotus Petal) फाउंडेशन सामने आई। यह फाउंडेशन केवल  सहयोग ही नहीं बल्‍कि उन लोगों को भी मदद दे रही है जिन्‍हें तत्‍काल सहायता की जरूरत है। सलोनी भारद्वाज (Saloni Bhardwaj) के नेतृत्‍व में काम करने वाला यह फाउंडेशन महामारी के मुश्‍किल दौर में लोगों के लिए मददगार साबित हो रहा है। फाउंडेशन की को-फाउंडर और सीटीओ सलोनी को 'Grant Thorton Bharat SABERA2020 ( सबेरा 2020 )' की ओर से 'सोशल लीडर ऑफ द ईयर' के अवार्ड से सम्‍मानित किया गया है। 

सोशल लीडर ऑफ द ईयर अवार्ड वैसे NGO या CSR टीम के नेतृत्‍व को दिया जाता है जो सामाजिक क्षेत्र में असाधारण काम करते हैं। ग्रांट थॉर्टन भारत सबेरा अवार्ड (Grant Thorton Bharat SABERA awards) की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। इस अवार्ड से सम्‍मानित सलोनी ने वर्ष 2013 में लोटस पेटल की शुरुआत की थी और संगठन की जरूरतों के अनुसार अनेकों जिम्‍मेवारियों का निर्वाह किया। काम के प्रति सलोनी की तन्मयता और प्रतिबद्धता से लोटस पेटल में कार्यरत उनकी टीम को हर दिन जिंदगियों को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिलती है।

 सलोनी के नेतृत्‍व में लोटस पेटल फाउंडेशन ने एक संगठन का रूप ले लिया। यहां के विद्यार्थियों के लिए क्‍लासरूम का ऑनलाइन एजुकेशन में परिवर्तन  प्रभावी रहा। इसके लिए विद्यार्थियों को डिवाइसेज व टैबलेट आदि भी दिए गए। इसके अलावा ऑनलाइन क्‍लासेज के लिए विद्यार्थियों व उनके माता-पिता दोनों को साइकोलॉजिकल सपोर्ट और स्‍पेशल एजुकेशन के साथ ही काउंसलिंग भी उपलब्‍ध कराई गई। 

सलोनी ने अपने फाउंडेशन के जरिए महामारी के कारण भुखमरी से जूझते लोगों के लिए भोजन का इंतजाम कराया। इस क्रम में 3 लाख लोगों के लिए खाने की व्यलवस्था कराई गई। उल्‍लेखनीय है कि कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद के लिए कई संगठन सामने आए क्‍योंकि इस दौरान गरीबों और बेबस प्रवासी मजदूरों की समस्‍या पूरी दुनिया ने देखी।

Edited By: Monika Minal