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पहाड़ टूटने से दबा पूरा गांव, 100 से ज्यादा के मरने की आशंका

मुंबई [राज्य ब्यूरो]। भारी बारिश से पहाड़ टूटने के कारण पुणे जनपद का एक पूरा गांव मलबे में दब गया। मिट्टी और पत्थर के इस मलबे में तकरीबन 180 लोगों के फंसे होने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) के दल अब तक मलबे से 17 शव निकाल चुके हैं, जबकि 14 घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है।

Thu, 31 Jul 2014 07:48 AM (IST)
पहाड़ टूटने से दबा पूरा गांव, 100 से ज्यादा के मरने की आशंका

मुंबई [राज्य ब्यूरो]। भारी बारिश से पहाड़ टूटने के कारण पुणे जनपद का एक पूरा गांव मलबे में दब गया। मिट्टी और पत्थर के इस मलबे में तकरीबन 180 लोगों के फंसे होने की आशंका है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल (एनडीआरएफ) के दल अब तक मलबे से 17 शव निकाल चुके हैं, जबकि 14 घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया है।

बुधवार सुबह करीब चार से पांच बजे के बीच महाराष्ट्र के पुणे शहर से करीब 80 किमी दूर सह्याद्रि श्रृंखला की पहाड़ियों के बीच बसे मालिन गांव पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा। 12 ज्योतिर्लिंगों में एक भीमाशंकर से करीब 10 किमी नीचे बसे 44 घरों की आबादी वाले इस गांव पर पहाड़ी का एक हिस्सा टूटकर गिर पड़ा और पूरा गांव सोते-सोते ही मलबे के नीचे दब गया। बरसात का समय और संकरा पहाड़ी रास्ता होने के कारण तत्काल कोई मदद भी नहीं पहुंच सकी।

पुणे से महाराष्ट्र आपात सेवा की एंबुलेंस दिन निकलने के बाद वहां पहुंचीं, लेकिन मिट्टी हटाने के लिए जेसीबी और पोकलैंड जैसी मशीने व आपदा प्रबंधन टीमों के पहुंचने के बाद ही राहत कार्य शुरू हो सका। सूरज ढलने तक आधिकारिक सूचना के अनुसार 17 शव निकाले जा सके हैं और सिर्फ दो घायलों को अस्पताल भेजा गया है।

राहत कार्य की निगरानी कर रहे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल [एनडीआरएफ] के डीआइजी एसएस गुलेरिया के अनुसार फिलहाल सात टीमें राहत व बचाव के काम में लगी हैं। हर टीम में 42 सदस्य हैं। मलबे को हटाने का काम काफी सावधानी से किया जा रहा है, ताकि घायलों को जीवित निकाला जा सके। राज्य के राहत व पुनर्वास मंत्री पतंगराव कदम के अनुसार राज्य सरकार के कई विभाग अपने-अपने स्तर पर आपदा में फंसे लोगों को निकालने व राहत कार्य में लगे हैं।

बीच-बीच में हो रही भारी बारिश से राहत कार्य में बाधा भी आ रही है। हालांकि, मृतकों की संभावित संख्या को लेकर अभी कोई सरकारी बयान जारी नहीं हुआ है, लेकिन घटनास्थल के हालात को देखते हुए यह संख्या 100 से अधिक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में पिछले चार दिन से काफी बारिश हो रही है। नतीजतन कच्ची पहाड़ियों के बीच बसे इस गांव को दुर्घटना का शिकार होना पड़ा। मुंबई, पुणे और नाशिक क्षेत्र में अंधाधुंध विकास के चलते पहाड़ियों को काटने का काम पिछले कुछ साल में तेजी से बढ़ा है। बरसात के दिनों में पहाड़ों से नीचे उतरने वाले जल बहाव को रोकने वाले वृक्ष भी तेजी से काटे जा रहे हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि विकास की इसी अंधी दौड़ के कारण आंबेगाव तालुका के मालिन गांव को भूस्खलन का शिकार होना पड़ा।

बस ड्राइवर ने दी जानकारी

घटना की जानकारी तब सामने आई, जब रोज की तरह महाराष्ट्र राज्य परिवहन निगम की बस गांव में पहुंची। ड्राइवर को गांव का पता ही नहीं चला। तब ड्राइवर ने इस बारे में प्रशासन को जानकारी दी।

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