बीटिंग रिट्रीट में गूंजेगी 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन, इस साल नहीं बजेगा 'एबाइड विद मी'

इस साल बीटिंग रिट्रीट में ऐ मेरे वतन के लोगों की धुन की गूंज सुनाई देगी जिसे भारत-चीन युद्ध के बलिदानियों की याद में कवि प्रदीप ने लिखा है और आवाज मशहूर गायिका लता मंगेशकर ने दी है।

Monika MinalPublish: Sun, 23 Jan 2022 12:05 AM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 06:39 AM (IST)
बीटिंग रिट्रीट में गूंजेगी 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन, इस साल नहीं बजेगा 'एबाइड विद मी'

नई दिल्ली, प्रेट्र।  इस वर्ष के बीटिंग रिट्रीट समारोह (Beating Retreat Ceremony) में 29 जनवरी को सेना के बैंड में देश भक्ति गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन गूंजेगी। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बलिदानियों की याद में कवि प्रदीप के लिखे इस गीत को लता मंगेशकर ने सुरों से संवारा है। सेना की तरफ से शनिवार को जारी विवरणिका के मुताबिक महात्मा गांधी के पसंदीदा गीतों में से एक 'एबाइड विद मी' को इस बार बीटिंग रिट्रीट समारोह में नहीं रखा गया है। इस गीत को स्काटलैंड के कवि और गायक हेनरी फ्रांसिस लिटे ने 1847 में लिखा था। इस गीत को 2020 में भी बीटिंग रिट्रीट समारोह से हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन हंगामा होने के बाद इसे शामिल कर लिया गया था। 1950 से ही यह गीत बीटिंग रिट्रीट में बजता आया था।

विजय चौक पर बजेंगी 26 धुनें

सेना की विवरणिका (ब्रोशर) के मुताबिक 29 जनवरी को विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह में इस साल 26 धुनें बजाई जाएंगी। इनमें 'ऐ मेरे वतन के लोगों' के साथ ही 'हे कांचा', 'चन्ना बिलौरी', 'जय जनम भूमि', 'हिंद की सेना' और 'कदम कदम बढ़ाए जा' जैसे गीत शामिल हैं। बीटिंग रिट्रीट समारोह में 44 बिगुल वादक, 16 तुरही बजाने वाले और 75 ढोल वादक भाग लेंगे। बता दें कि यह आयोजन एक ऐसी परंपरा का हिस्‍सा है जिसमें सेना की वापसी पर बैंड धुनें बजाई जाती है। 

कांग्रेस का विरोध

समारोह से 'एबाइड विद मी' गीत को हटाने का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस नेता अजय कुमार ने ट्वीट किया, 'नया भारत, न अमर जवान ज्योति, न बीटिंग रिट्रीट के दौरान एबाइड विद मी।' कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने भी ट्वीट कर कहा कि तुच्छ भाजपा सरकार द्वारा बापू की विरासत को मिटाने का एक और प्रयास। शिव सेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी सरकार पर हमला बोलते हुए पूछा कि क्या 'न्यू इंडिया' को फिर से लिखने के लिए अमूल्य परंपराओं को छोड़ना जरूरी है।

Edited By Monika Minal

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