आज ही के दिन हुई थी एक मिनट में 100 गोली चलाने वाली आधुनिक राइफल की खोज, जानिए क्या है नाम

आज ही के दिन 1946 में कलाश्निकोव राइफल की खोज की गई थी। ये राइफल पानी के अंदर भी सटीक निशाना लगाने में सक्षम है इसी के साथ ये एक मिनट में 100 फायर कर सकती है।

Vinay TiwariPublish: Sat, 06 Jul 2019 02:10 PM (IST)Updated: Sat, 06 Jul 2019 02:10 PM (IST)
आज ही के दिन हुई थी एक मिनट में 100 गोली चलाने वाली आधुनिक राइफल की खोज, जानिए क्या है नाम

नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। आज से ठीक 71 साल पहले सोवियत संघ में AK-47(एके-47) को सोवियत सेना में शामिल किया गया था। इससे पहले 1945 में इसका निर्माण शुरू हुआ था, 1946 में इसे सैन्य परीक्षणों के लिए प्रस्तुत किया गया और 1948 में इसे सेना में शामिल किया गया। इसे आधिकारिक तौर पर Avtomat Kalashnikova के रूप में जाना जाता है (रूसी- Автома́т Калаашникова, tr। Avtomát Kaláshnikova, lit. Automatic device Kalashnikov और Kalashnikov and AK के नाम से भी जाना जाता है)। क्लाशिनिकोव एक गैस-संचालित मिमी असॉल्ट राइफल विकसित की गई है। चूंकि इसका डिजाइन बनाने वाले का नाम मिखाइल कलाश्निकोव था, इस वजह से इसका नाम एके 47 रखा गया। यह कलाश्निकोव राइफल या एके एक मिनट में लगभग 100 गोलियां फायर करने वाली बंदूक है। 

AK-47 पर डिजाइन का काम 1945 में शुरू हुआ था। 1946 में, AK-47 को आधिकारिक सैन्य परीक्षणों के लिए प्रस्तुत किया गया था और 1948 में, फिक्स्ड-स्टॉक संस्करण को सोवियत सेना की चयनित इकाइयों की सेवा में पेश किया गया था। डिजाइन का एक प्रारंभिक विकास AKS (S-Skladnoy या "फोल्डिंग") था। ये एक अंडरफॉलिंग मेटल शोल्डर स्टॉक से लैस था। 1949 की शुरुआत में, एके -47 को आधिकारिक रूप से सोवियत सशस्त्र बलों द्वारा स्वीकार किया गया था और वारसॉ संधि के सदस्य देशों के बहुमत द्वारा उपयोग किया गया था।  

सात दशकों के बाद भी, मॉडल और इसके वेरिएंट दुनिया में सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली असॉल्ट राइफलें हैं क्योंकि कठोर परिस्थितियों में इसकी विश्वसनीयता, समकालीन पश्चिमी हथियारों की तुलना में कम उत्पादन लागत, लगभग हर भौगोलिक क्षेत्र में उपलब्धता और उपयोग में आसानी है। AK-47 कई देशों में निर्मित किया गया है और सशस्त्र बलों के साथ-साथ दुनिया भर में अनियमित बलों और विद्रोहियों के साथ सेवा को देखा है। जानकारी के अनुसार इस समय दुनिया भर में अनुमानित 500 मिलियन आग्नेयास्त्र है जिसमें लगभग 100 मिलियन कलाश्निकोव के हैं जिनमें से तीन-चौथाई AK-47 हैं। 

किफायती और सरल उपयोग के लिए अक्सर राइफल एके-47 का वैरिएंट ही रहा। इस राइफल से आसानी से सैकड़ों की जान ली जा सकती है और आधुनिक सैनिकों और पुलिस बलों से टक्कर ले सकते हैं। हाल के वर्षों में अमेरिकी मिलिट्री के क्ल’श्निकोव के जवाब में वे AR-15 का उपयोग भी करने लगे। AR-15 के सेमी ऑटोमैटिक वर्जन का उपयोग कैलिफोर्निया के सैन बनार्डिनो में इस्लामी राज्य के समर्थकों द्वारा किया गया है। आतंकियों के हाथ में मिलिटरी स्टाइल के राइफल्स का उपयोग बड़े स्तर पर लोगों को मारने के लिए बार बार किया जा रहा है। अभी क्लाश्निकोव और AR-15 के वैरिएंट्स को सामान्य रूप से देखा जा सकता है, हर युद्ध में इन हथियारों का उपयोग होता है। यूरोप में इस्लामिक स्टेट ने काफी अधिक लोगों को बम की जगह बुलेट से मारा है। 

अमेठी में भी बन रही एके-47 

संसदीय क्षेत्र अमेठी अब जल्द ही सेना के जवानों के लिए मेक इन इंडिया के तहत एके-47 असॉल्ट राइफल का निर्माण कर रहा है। राहुल की संसदीय क्षेत्र में मोदी सरकार ने AK-47 की फैक्ट्री लगाने का दांव खेला। बता दें कि कलाश्निकोव राइफल AK-47 का लेटेस्ट वर्जन है। ये फैक्ट्री रूस की एक कंपनी और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड साथ मिलकर बनाएगी, जिसमें 7.47 लाख कलाश्निकोव राइफल बनाई जाएगी। 

हर साल 45 हजार गन निर्माण का दावा

ऑर्डनेंस फैक्ट्री कोरवा के आधिकारिक सूत्रों का दावा है कि यहां हर साल 45 हजार क्लोज क्वार्टर बैटल कारबाइन का निर्माण करने का लक्ष्य तय है। इसमें 20 हजार 5.56 एमएम इंसास राइफल, पांच-पांच हजार पिस्टल, रिवॉल्वर व स्पोर्ट्स राइफल का निर्माण होता है। 

राहुल गांधी ने रखी थी फैक्ट्री की आधारशिला

अमेठी में ऑर्डनेंस फैक्ट्री स्थापित करने की रूपरेखा 2007 में भारत सरकार ने बनाई थी। अक्टूबर 2010 में सांसद राहुल गांधी ने फैक्ट्री की आधारशिला रखी। जबकि 408.01 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली इस फैक्ट्री को सिविल वर्क के लिए 2014 में 48 करोड़ की रकम और जारी की गई।

अमेठी में अब तक लगे हैं ये प्लांट

हिन्दुस्तान एरोनाटिकल लिमिटेड (एचएएल)

इंडोगोल्फ फर्टिलाइजर

बीएचईएल प्लांट

इंडियन ऑयल यूनिट

फूड प्रोसेसिंग इकाई

रेल नीर प्लांट

एसीसी

ये है AK-47 की खासियत

AK-47 वह हथियार है, जिससे पानी के अंदर से हमला करने पर भी गोली सीधे जाती है। गोलियों की गति इतनी तेज होती है कि पानी का घर्षण भी उसे कम नहीं कर पाता है। यह बेहद सिपंल राइफल है और बहुत आसानी से इसका निर्माण किया जा सकता है। इसलिए दुनिया में यह एक मात्र ऐसी राइफल है जिसकी सबसे ज्यादा कॉपी की गई है। यह एक मात्र ऐसा हथियार है, जो हर प्रकार के पर्यावरण में चलाया जा सकता है और एक मिनट के अंदर इसे साफ किया जा सकता है। इस राइफल में पहले की सभी राइफल तकनीकों का मिश्रण है। अगर विस्तार से देखें तो इसके लोकिंग डिजाइन को एम1 ग्रांड राइफल से लिया गया है। इसका ट्रिगर और सेफ्टी लॉक रेमिंगटन राइफल मॉडल 8 से लिया गया है जबकि गैस सिस्टम और बाहरी डिजाइन एस.टी.जी.44 से लिया गया है। 

AK-47 नाम पीछे जानिए रहस्य

ये मिखाइल का ऑटोमैटिक हथियार है इसलिए इसका नाम दिया गया आवटोमैट कलाशनिकोवा, जिसे बाद में ऑटोमैटिक कलाश्निकोव कहा जाने लगा। शुरुआती मॉडल में कई दिक्कतें थीं लेकिन साल 1947 में मिखाइल ने आवटोमैट कलाशनिकोवा मॉडल को पूरा कर लिया। बोलने में मुश्किल होने की वजह से इसे संक्षिप्त कर AK-47 कहा जाने लगा। AK के सिर्फ AK-47 मॉडल ही नहीं है अब तो इसके कई मॉडल बाजार में उपलब्ध हैं। जिसमें AK-74, AK-103 के आलावा कई शामिल हैं। 

Edited By Vinay Tiwari

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept