इसरो इस साल लांच कर सकता है आदित्य-एल1

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के पूर्व प्रमुख एएस किरण कुमार ने भारत और अमेरिका के एक संयुक्त वर्कशाप में कहा कि भविष्य में इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी भी चंद्रमा को लेकर एक मिशन पर सहयोग करेंगी। इस वर्कशाप का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव के तहत किया गया था।

Monika MinalPublish: Sat, 29 Jan 2022 03:07 AM (IST)Updated: Sat, 29 Jan 2022 04:44 AM (IST)
इसरो इस साल लांच कर सकता है आदित्य-एल1

नई दिल्ली, आइएएनएस। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) इस साल आदित्य-एल1 अंतरिक्षयान लांच कर सकता है। अपनी तरह का यह पहला अंतरिक्षयान सूर्य का अध्ययन करेगा। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के पूर्व प्रमुख एएस किरण कुमार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

किरण कुमार ने इसके अलावा अन्य जानकारियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा, मार्स आर्बिटर मिशन ने मंगल का अध्ययन करते हुए सात साल पूरे कर लिए हैं। इसने खगोलीय अनुसंधान के लिए बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण अध्ययनों के लिए डाटा उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा, चंद्रयान दो आर्बिटर के सभी पेलोड चालू हैं। यह कई और वर्षो तक सेवा में बना रह सकता है।  भारत और अमेरिका के एक संयुक्त वर्कशाप में उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इसरो और जापान की अंतरिक्ष एजेंसी भी चंद्रमा को लेकर एक मिशन पर सहयोग करेंगी। इस वर्कशाप का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव के तहत किया गया था।

मिशन गगनयान के लिए बेंगलुरु में बना ट्रेनिंग सेंटर

ISRO के नवनियुक्त अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से कुछ दिन पहले मुलाकात की और गगनयान (Gaganyan Mission) की स्थिति के साथ-साथ निकट भविष्य के अन्य अंतरिक्ष मिशनों पर चर्चा की।

एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सिंह ने कहा कि सोमनाथ बहुत ही महत्वपूर्ण समय पर प्रतिष्ठित कार्यभार संभाल रहे हैं और नियति ने उन्हें भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ सहित कुछ सबसे ऐतिहासिक मिशनों के माध्यम से इसरो का नेतृत्व करने का मौका दिया है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि पहले मानवरहित मिशन के बाद दूसरा मानवरहित मिशन ‘व्योममित्र’ रोबोट ले जाएगा। इसके बाद मानव मिशन होगा। विज्ञप्ति के मुताबिक मंत्री को यह भी बताया गया कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों ने रूस में सफलतापूर्वक सामान्य अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण प्राप्त किया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि ‘गगनयान’ विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए बेंगलुरु में एक समर्पित अनौपचारिक अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किया गया है।

Edited By Monika Minal

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