गूगल पर हिंदी में कुछ भी खोजिए

वर्तमान में गूगल पर हिंदी भाषा में कुछ खोजना टेढ़ी खीर है, लेकिन जल्द ही यह काम बेहद आसान हो जाएगा। आप इस सर्च इंजन पर जाकर हिंदी में कुछ भी खोज सकते हैं। दरअसल दिग्गज तकनीकी कंपनी गूगल गैर महानगरीय इलाकों (टियर टू और टियर थ्री स्तर के शहर)

Rajesh NiranjanPublish: Wed, 19 Aug 2015 12:14 AM (IST)Updated: Wed, 19 Aug 2015 11:05 AM (IST)
गूगल पर हिंदी में कुछ भी खोजिए

बेंगलुरु। वर्तमान में गूगल पर हिंदी भाषा में कुछ खोजना टेढ़ी खीर है, लेकिन जल्द ही यह काम बेहद आसान हो जाएगा। आप इस सर्च इंजन पर जाकर हिंदी में कुछ भी खोज सकते हैं। दरअसल दिग्गज तकनीकी कंपनी गूगल गैर महानगरीय इलाकों (टियर टू और टियर थ्री स्तर के शहर) के यूजर्स (उपभोक्ताओं) की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए अपनी 'मैप्स' और 'सर्च' जैसी सेवाओं को क्षेत्रीय, विशेषकर हिंदी में बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

गूगल इंडिया के विपणन निदेशक संदीप मेनन ने मंगलवार को बताया, 'यहां करीब 50 करोड़ लोग हिंदी में बोलते हैं, लेकिन विकिपीडिया पर हिंदी में उपलब्ध आलेखों की संख्या मात्र एक लाख है। भारत में इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। यह 2011 में दस करोड़ थी, जो अब 30 करोड़ है और यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट आधार हो गया है। हम 2017 तक इस संख्या को 50 करोड़ तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।'

उन्होंने बताया कि देश में पांच में से एक यानी 20 फीसद उपभोक्ता इंटरनेट हिंदी में देखना पसंद करते हैं। कंपनी के ही एक उत्पाद 'गूगल हाउस' को प्रदर्शित करते हुए मेनन ने कहा कि यह हिंदी भाषा के बढ़ते उपयोग का एक गवाह है। वह बोले, 'वेब में शुरुआत से ही हिंदी विषयवस्तु का उपयोग हो रहा है। इसमें अंग्रेजी के 19 फीसद के मुकाबले सालाना 94 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।'

कुछ विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मेनन ने कहा, गूगल ने हाल ही में एक नई सुविधा 'इंस्टेंट ट्रांसलेशन' शुरू की थी। इसके माध्यम से प्रिंटेड टेक्स्ट (छपी हुई विषयवस्तु) का भी अनुवाद किया जा सकता है। मेनन ने बताया, 'भारत की बात करें तो यहां मोबाइल फोन धारकों में इंटरनेट का उपयोग करने की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2011 में दो करोड़ मोबाइल फोन धारक इंटरनेट का उपयोग करते थे, जबकि अब अपने स्मार्ट फोन पर इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या 15 करोड़ के पार है। अनुमान है कि 2017 तक यह संख्या करीब 49 करोड़ तक पहुंच जाएगी।'

Edited By Rajesh Niranjan

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