जानें क्‍यों एक दिवंगत सैन्य पायलट के पिता ने राष्ट्रपति से पानी के भीतर जीवित रहने का प्रशिक्षण अनिवार्य करने की लगाई गुहार

जम्मू-कश्मीर में पिछले साल हेलीकाप्टर दुर्घटना में मृत सेना के पायलट कैप्टन जयंत जोशी के पिता हरीश चंद्र जोशी ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि सभी सैन्य पायलटों के लिए पानी के भीतर जीवित रहने का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए...

Krishna Bihari SinghPublish: Mon, 17 Jan 2022 12:42 AM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 07:53 AM (IST)
जानें क्‍यों एक दिवंगत सैन्य पायलट के पिता ने राष्ट्रपति से पानी के भीतर जीवित रहने का प्रशिक्षण अनिवार्य करने की लगाई गुहार

नई दिल्ली, पीटीआइ। जम्मू-कश्मीर में पिछले साल हेलीकाप्टर दुर्घटना में मृत सेना के पायलट कैप्टन जयंत जोशी के पिता हरीश चंद्र जोशी ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि सभी सैन्य पायलटों के लिए पानी के भीतर जीवित रहने का प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए और उन्हें आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों से लैस किया जाए।

आर्मी एविएशन की 254 स्क्वाड्रन के कैप्टन जयंत जोशी की तीन अगस्त, 2021 को जम्मू-कश्मीर में रंजीत सागर डैम के ऊपर हेलीकाप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। आर्मी एविएशन के रुद्र वेपन सिस्टम इंटीग्रेटेड (डब्ल्यूएसआइ) हेलीकाप्टर के पायलट जयंत जोशी, परीक्षण पायलट और वैमानिकी प्रशिक्षक लेफ्टिनेंट कर्नल एएस बाथ के साथ 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हथियारों को लेकर लक्ष्य प्राप्ति और तैनाती का अभ्यास कर रहे थे, जब यह दुर्घटना हुई थी।

हरीश चंद्र जोशी ने अपने पत्र में कहा है, 'इस दुर्घटना ने आर्मी एविएशन में अपनाई जा रही सुरक्षा प्रक्रियाओं में कई स्पष्ट खामियों को उजागर किया है। इसने स्पष्ट रूप से सेना के उड्डयन मामलों के लिए जिम्मेदार लोगों के बीच पायलट सुरक्षा और प्रशिक्षण आवश्यकताओं के मामले में उदासीनता और उपेक्षा के रवैये को भी उजागर किया है।' राष्ट्रपति सचिवालय ने यह शिकायत रक्षा सचिव को भेज दी है।

उन्होंने सवाल किया कि रुद्र हेलीकाप्टर को पानी के ऊपर क्यों उड़ाया जा रहा था? जोशी ने कहा, 'मेरा सवाल यह है कि अगर रुद्र को पानी के ऊपर नहीं उड़ाया जाना था तो स्क्वाड्रन के हेलीकाप्टर को नियमित रूप से पानी वाले उस क्षेत्र में उड़ान भरने के लिए क्यों भेजा जा रहा था, जो 25 किलोमीटर लंबा और आठ किलोमीटर चौड़ा था?'

जोशी ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि यह नीची उड़ान के लिए उपलब्ध एकमात्र क्षेत्र है क्योंकि यह बाधाओं से मुक्त है। पत्र में उन्होंने कहा, 'अगर ऐसा है तो क्या सेना के उड्डयन मामलों को देखने के लिए जिम्मेदार किसी ने बुनियादी प्रशिक्षण आवश्यकताओं को महसूस किया और उन्हें उड़ान भरने के लिए भेजने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपकरण प्रदान किए।' 

Edited By Krishna Bihari Singh

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