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अभी तक covid-19 का बच्‍चों पर गंभीर प्रभाव नहीं, लेकिन यदि रूप बदला तो बढ़ सकता है खतरा- डॉक्‍टर पॉल

नी‍ति आयोग के सदस्‍य डॉक्‍टर वीके पॉल का कहना है कि फिलहाल कोरोना की वजह से बच्‍चों पर कोई गंभीर असर नहीं देखा गया है। लेकिन यदि इसमें बदलाव होता है तो ये बच्‍चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

Kamal VermaWed, 02 Jun 2021 03:38 PM (IST)
अभी तक covid-19 का बच्‍चों पर गंभीर प्रभाव नहीं, लेकिन यदि रूप बदला तो बढ़ सकता है खतरा- डॉक्‍टर पॉल

नई दिल्‍ली (पीटीआई)। भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने लोगों को काफी प्रभावित किया है। हालांकि राहत की बात ये है कि इस संक्रमण से बच्‍चों पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं देखा गया है। लेकिन यदि कोरोना वायरस के मौजूदा स्‍वरूप ने में बदलाव आया तो ये बच्‍चों को गंभीर रूप से संक्रमित कर सकता है। इस बात की आशंका नीति आयोग के सदस्‍य डॉक्‍टर वीके पॉल ने जताई है। उन्‍होंने पत्रकारों को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सरकार तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर अपनी तैयारियों को पुख्‍ता करने में लगी है।

गौरतलब है कि कई विशेषज्ञ इस बात की आशंका जता चुके हैं कि देश में कोरोना महामारी की तीसरी लहर आ सकती है। रिपोर्ट्स में इस बात का भी अंदेशा जताया जा रहा है कि तीसरी लहर में बच्‍चे सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। डॉक्‍टर पॉल का कहना है कि बच्‍चों में कोरोना मामले के लक्षण अक्‍सर कम ही दिखाई देते हैं या बेहद कम ही लक्षण दिखाई देते हैं। पॉल के मुताबिक अभी तक बच्‍चों में संक्रमण ने गंभीर रूप नहीं लिया है। उनके मुताबिक केवल दो से तीन फीसद बच्‍चों को ही कोरोना के लक्षण सामने आने के बाद अस्‍पतालों में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है।

उनका कहना है कि सरकार इस दिशा में अपने पूरे प्रयास कर रही है। पॉल के मुताबिक बच्‍चों पर कोरोना का दो तरह से असर देखा जा सकता है। इसमें से पहला है कि उनमें निमोनिया का कोई लक्षण दिखाई देता हो। दूसरा लक्षण है कि उन्‍हें मल्‍टी इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम की समस्‍या हो रही हो।

इस संवाददाता सम्‍मेलन में पॉल ने ये भी कहा कि वैक्‍सीन की कॉकटेल पर विशेषज्ञ एकराय नहीं है। इसको लेकर दो बाते सामने आई हैं। उनका कहना कि वैक्‍सीन की कॉकटेल से परिणाम गलत भी सामने आ सकते हैं और ये उपयोगी भी साबित हो सकता है। दो अलग-अलग वैक्‍सीन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। उनकी राय में जब तक इसका कोई ऐसा हल नहीं निकलता है कि जिसपर अधिकतर विशेषज्ञ राजी हों तब तक भारत में चल रहे वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।