नगालैंड से अफस्पा हटाने पर विचार के लिए समिति गठित, केंद्र सरकार ने तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा

गृह मंत्रालय में पूर्वोत्तर भारत प्रभाग ने 26 दिसंबर के अपने आदेश में कहा है कि नगालैंड में अफस्पा की समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की गई है। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त डा. विवेक जोशी को इसका चेयरमैन बनाया गया है।

Dhyanendra Singh ChauhanPublish: Tue, 28 Dec 2021 08:17 PM (IST)Updated: Tue, 28 Dec 2021 08:17 PM (IST)
नगालैंड से अफस्पा हटाने पर विचार के लिए समिति गठित, केंद्र सरकार ने तीन हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा

नई दिल्ली, एएनआइ। केंद्र सरकार ने नगालैंड से सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम, 1958 (अफस्पा) हटाने पर विचार करने के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। साथ ही समिति से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को भी कहा है। गृह मंत्रालय में पूर्वोत्तर भारत प्रभाग ने 26 दिसंबर के अपने आदेश में कहा है कि नगालैंड में अफस्पा की समीक्षा करने के लिए एक समिति गठित की गई है। महापंजीयक और जनगणना आयुक्त डा. विवेक जोशी को इसका चेयरमैन बनाया गया है।

समिति में नगालैंड के मुख्य सचिव जे. आलम को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पीसी नायर, नगालैंड के पुलिस महानिदेशक टी. जान लांगकुमार, खुफिया ब्यूरो के संयुक्त निदेशक डा. एमएस तुलसी भी इसके सदस्य बनाए गए हैं। गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव पीयूष गोयल समिति के सचिव होंगे जबकि सैन्य आपरेशन के महानिदेशक (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू को समिति में विशेष आमंत्रित के तौर पर शामिल किया गया है।

गृह मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि समिति नगालैंड में अफस्पा लगाने की समीक्षा करेगी और तीन महीने के भीतर उपयुक्त सुझाव देगी।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 23 दिसंबर को अपने सरकारी आवास पर नगालैंड के मौजूदा हालात की समीक्षा की थी। इसमें नगालैंड और असम के मुख्यमंत्रियों के साथ ही अन्य कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इसी में नगालैंड से अफस्पा हटाने पर विचार करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय किया गया था।

जानिए क्या है अफस्पा

इसी महीने की शुरुआत में हुई फायरिंग की इस घटना के विरोध में नगालैंड के कई जिलों में हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों में अफस्पा को हटाए जाने की मांग की गई थी। अफस्पा के तहत देश के अशांत क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा बलों को अधिकार मिल जाता है कि वे चेतावनी के बगैर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं या तलाशी अभियान चला सकते हैं। इस दौरान होने वाली फायरिंग में अगर किसी की जान चली जाती है तो उसके लिए सुरक्षा बल जिम्मेदार नहीं होगा। उत्तर-पूर्व के कई अशांत प्रदेशों और जम्मू-कश्मीर में कई दशकों से अफस्पा लागू है।

Edited By Dhyanendra Singh Chauhan

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept
ट्रेंडिंग न्यूज़

मौसम