छत्तीसगढ़ के छात्रों ने बनाया बोन कंडक्शन उपकरण, श्रवण बाधितों के लिए बनेगा वरदान

भिलाई के इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने ऐसा बोन कंडक्शन उपकरण तैयार किया है जिससे श्रवण बाधित भी आसपास की ध्वनि को सामान्य व्यक्तियों की तरह आसानी से सुन सकेंगे।

Manish PandeyPublish: Thu, 30 May 2019 01:24 PM (IST)Updated: Thu, 30 May 2019 01:24 PM (IST)
छत्तीसगढ़ के छात्रों ने बनाया बोन कंडक्शन उपकरण, श्रवण बाधितों के लिए बनेगा वरदान

रायपुर। जेएनएन। भिलाई के इंजीनियरिंग के दो छात्रों ने ऐसा बोन कंडक्शन उपकरण तैयार किया है, जिससे श्रवण बाधित भी आसपास की ध्वनि को सामान्य व्यक्तियों की तरह आसानी से सुन सकेंगे। छोटे आकार का यह उपकरण कलाई में घड़ी की तरह पहना जा सकेगा, जिससे इसका संपर्क हड्डियों से रहे। फौजियों के लिए भी यह काफी उपयोगी साबित होगा, जो ऑपरेशन के दौरान हेडफोन के जरिए अधिकारियों से जुड़े रहते हैं और आसपास की आवाज नहीं सुन पाते। छात्रों की प्रतिभा ही है कि इसरो के रिटायर्ड वैज्ञानिक इसमें सहयोग कर रहे हैं। खास बात यह कि अमेरिका में इस तकनीक से तैयार उपकरण जहां काफी महंगे हैं, यह मशीन बाजार में मात्र हजार रुपये में उपलब्ध होगी। छात्रों ने इसका पेटेंट भी करा लिया है।

छात्र जयदीप तिवारी और के. कार्तिक ने बताया कि ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआइसीटीई) ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता कराई थी। इसमें उनके आविष्कार बोन कंडक्शन को प्रथम पुरस्कार स्वरूप दस लाख रुपया मिला है। इसरो के रिटायर्ड वैज्ञानिक दीपक भोपटकर और मैंटर पुणे हर्मन टेक्नोलॉजी के वाइस प्रेसिडेंट सुदर्शन नाटु इस आविष्कार पर काम करने के लिए उन्हें सहयोग कर रहे हैं। चार महीने के भीतर यह उपकरण बाजार में आ जाएगा। वर्ल्ड बैंक से संबंधित लैब सेंट्रल ऑफ एक्सीलेंट इन सीओईपी में वे इस उपकरण पर काम कर रहे हैं।

इस तरह हुआ आविष्कार

छात्रों ने बताया कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान हेडफोन से बहुत दिक्कतें होती थीं। ऐसे में वायरलेस हेडफोन बनाने की सोची। वायरलेस हेडफोन तैयार किया तो उससे कानों में दर्द होने लगा। इस तरह कई प्रयोग किए और बोन कंडक्शन बनाने में कामयाबी मिल गई। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम बिजनेस इनक्यूबेटर एसीआई 36 इंक से संपर्क किया। उन्होंने उनके आविष्कार को एआइसीटीई की प्रतियोगिता में भेज दिया। इस तरह सफलता का रास्ता खुलता गया।

इसका परीक्षण भी किया

जयदीप व कार्तिक ने बताया कि अपने आविष्कार को लेकर वे श्रवण बाधितों के बीच पहुंचे। उनकी कलाई में उपकरण लगाने के बाद जैसे ही उन्होंने बोलना शुरू किया, श्रवण बाधित बच्चे रो पड़े। पहले तो कुछ समझ नहीं आया, फिर पता चला की उन्होंने पहली बार आवाज सुनी थी, जिसकी खुशी में आंसू निकल रहे थे।

किनके लिए कारगर नहीं

ऐसे श्रवण बाधित जिनके कानों के कॉक्लियर खराब हो गए हों, उनके लिए यह उपकरण कारगर नहीं है। वहीं जिनके कानों के ड्रम खराब हुए हों, उनके लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।

फौजियों के लिए बड़े काम की

छात्रों ने बताया कि सेना के लिए यह उपकरण काफी काम का है। ऑपरेशन के दौरान फौजी अधिकारियों के संपर्क में रहने के लिए हेडफोन का उपयोग करते हैं। ऐसे में आसपास की आवाज वे नहीं सुन पाते, जो कई बार घातक साबित होता है। इस उपकरण से यह समस्या खत्म हो जाएगी।

दीपक भोपटकर, रिटायर्ड वैज्ञानिक, इसरो

छात्रों का तैयार किया बोन कंडक्शन विशेष आविष्कार है। श्रवण बाधितों और सेना के लिए यह बहुत कारगर है। कीमत कम होने के कारण सभी इसे खरीद सकेंगे। उपयोग का तरीका भी बड़ा आसान है।

 

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Edited By Manish Pandey

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