Beating Retreat Videos : एक हजार ड्रोन से उकेरा 'आजादी का अमृत महोत्सव', 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन ने किया भाव विभोर

विजय चौक पर शनिवार को बीटिंग रिट्रीट समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। इसमें पहली बार ड्रोन शो का भी आयोजन हुआ।

Krishna Bihari SinghPublish: Sat, 29 Jan 2022 05:22 PM (IST)Updated: Sun, 30 Jan 2022 02:12 AM (IST)
Beating Retreat Videos : एक हजार ड्रोन से उकेरा 'आजादी का अमृत महोत्सव', 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन ने किया भाव विभोर

नई दिल्‍ली, एजेंसियां। ऐतिहासिक विजय चौक पर शनिवार को बीटिंग द रिट्रीट के साथ 73वें गणतंत्र दिवस समारोह का समापन विशिष्ट तरीके से हुआ। जहां, आसमान में एक हजार ड्रोन ने आजादी का अमृत महोत्सव को दर्शाती शानदार तस्वीरें उकेरीं। वहीं लता मंगेशकर का गाया गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन भी पहली बार बजाई गई। ड्रोन से लेकर प्रोजेक्शन मैपिंग शो तक, इस साल पहली बार कई नई शुरुआत देखने को मिलीं। पिछले 70 सालों में पहली बार महात्मा गांधी की पसंदीदा धुन 'अबाइड विद मी' इस बार विजय चौक पर नहीं सुनाई दी। इसकी जगह 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन बजाई गई।

पहली बार अविस्‍मरणीय ड्रोन शो की प्रस्‍तुति

यह पहली बार था जब बीटिंग द रिट्रीट समारोह के अंत में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) द्वारा वित्त पोषित और आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्रों के नेतृत्व में भारतीय स्टार्टअप बोटलैब की ओर से लाइट शो के एक हिस्से के तौर पर 1,000 ड्रोन ने अविस्‍मरणीय प्री-रिर्काडेड और संगीतमय प्रस्‍तुति दी।

'वंदे मातरम' की धुन ने किया अभीभूत 

बीटिंग द रिट्रीट समारोह के समापन के मौके पर लेजर शो के दौरान 'वंदे मातरम' की धुन बजाई गई जिसने दर्शकों को देशभक्ति के भाव से ओत-प्रोत कर दिया। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत आयोजित 10 मिनट के ड्रोन शो का आयोजन स्टार्टअप बोटलैब डायनेमिक्स द्वारा किया गया।

ऐसा ड्रोन शो आयोजित करने वाला भारत चौथा देश 

बीटिंग द रिट्रीट समारोह के समापन के मौके पर स्‍वदेशी 1,000 ड्रोन दर्शकों को रोमांचित करते नजर आए। 1,000 ड्रोन के साथ इतने बड़े पैमाने पर ड्रोन शो का आयोजन करने के साथ ही चीन, रूस और ब्रिटेन के बाद ऐसा भव्‍य प्रदर्शन करने वाला भारत चौथा देश बन गया।

बैंड ने वापसी बजाई 'सारे जहां से अच्‍छा' की धुन

बीटिंग द रिट्रीट समारोह के समापन के लिए टुकड़‍ियों के कमांडर ने राष्‍ट्रपति से मंजूरी मांगी जिसके साथ ही बलों ने अपने कैंपों में वापसी परेड शुरू की। बैंड ने वापसी परेड में 'सारे जहां से अच्‍छा' की धुन बजाई जिसने सभी को अभीभूत कर दिया।

'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन पर बज उठी तालियां

बीटिंग द रिट्रीट के मौके पर सेनाओं के बैंड ने 'ऐ मेरे वतन के लोगों' की धुन बजाई जिसने सभी को मंत्रमुग्‍ध कर दिया। समारोह में मौजूद राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तालियों से इसका स्‍वागत किया। इस गीत को कवि प्रदीप ने 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय जवानों द्वारा किए गए सर्वोच्च बलिदान की याद में लिखा था।

नहीं बजाई गई 'एबाइड विद मी' की धुन

1847 में स्काटलैंड के एंग्लिकन कवि हेनरी फ्रांसिस लिटे द्वारा लिखित गीत 'एबाइड विद मी' की धुन को इस आधार पर हटा दिया गया कि 'आजादी का अमृत महोत्सव' में भारतीय धुन बजाना उचित होगा। समारोह में पहली बार 'केरल' और 'हिंद की सेना' की धुनें भी थीं।

स्वदेशी तकनीक ने बांध दिया समा

संगीत के साथ 10 मिनट तक आसमान स्वदेशी तकनीक के माध्यम से तैयार ड्रोन की रोशनी से जगमगा उठा। नार्थ और साउथ ब्लाक की दीवारों पर आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में प्रोजेक्शन मैपिंग शो ने समां बांध दिया। इस दौरान थल सेना, नौसेना, वायु सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड की धुनें गूंज रही थीं।

रंग बिरंगी लाइटों से सजा राष्‍ट्रपति भवन

बीटिंग द रिट्रीट के मौके पर नार्थ ब्लॉक साउथ ब्लॉक सहित राष्ट्रपति भवन को रंग बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद थे। 

बजाई गईं 26 धुनें

कार्यक्रम में भारतीय सेना, नौसेना, वायु सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड की ओर से 26 धुनें बजाई गईं। विजय चौक पर 'कदम कदम बढ़ाए जा' की धुन के साथ सेनाओं के मार्चिंग दस्‍तों ने परेड किया जिसका नजारा बेहद शानदार था।

हर साल होता है आयोजन

हर साल 29 जनवरी को राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली के विजय चौक पर बीटिंग द रिट्रीट समारोह का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही गणतंत्र दिवस के समारोह का समापन होता है।

काफी पुरानी है यह परंपरा 

बीटिंग रिट्रीट की परंपरा काफी पुरानी है। यह समारोह सेना की वापसी का प्रतीक है। इस दौरान राष्ट्रपति सेनाओं को अपनी बैरकों में लौटने की इजाजत देते हैं। देश में 1950 के दशक में बीटिंग रिट्रीट की शुरुआत हुई थी। उस समय सेना के मेजर राबर्ट ने सेनाओं के बैंड्स प्रदर्शन के साथ समारोह को पूरा किया था।

सेनाओं के अपने बैरक में लौटने का प्रतीक

बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी को सेनाओं के अपने बैरक में लौटने का प्रतीक माना जाता है। जब सेनाएं युद्ध समाप्त करके लौटती थी तो अपने अस्त्र-शस्त्र उतार कर रखती थीं। आम तौर पर सूर्यास्त के समय ही सेनाएं अपने शिविर में लौटती थीं। इस दौरान झण्डे नीचे उतारते जाते थे।

बैंड धुनों से होता है जोरदार स्‍वागत

यह समारोह बीते दौर की एक झलक होती है। यह एक ऐसी परंपरा का हिस्‍सा है जिसमें सेनाओं की वापसी पर उनका बैंड धुनों से जोरदार स्‍वागत किया जाता है। पाइप और ड्रम बैंड, सीएपीएफ, वायुसेना, नौसेना और सेना के बैंड अपनी शानदार प्रस्‍तुतियां देते हैं।

Edited By Krishna Bihari Singh

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