गुस्सा ताकत की नहीं, कमजोरी की निशानी, क्रोध पर विजय पाना जरूरी

जब हमारी तार्किक तरीके से सोचने-समझने की क्षमता काम करना बंद कर देती है तो हमारा गुस्सा हम पर काबू कर लेता है। वैसे भी देखा जाए तो आज तक दुनिया में गुस्से से किसी समस्या का हल नहीं निकला है।

Sanjay PokhriyalPublish: Sat, 22 Jan 2022 03:10 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 03:10 PM (IST)
गुस्सा ताकत की नहीं, कमजोरी की निशानी, क्रोध पर विजय पाना जरूरी

डा. अनिल सेठी।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर तरफ धैर्य की कमी और गुस्से की भरमार है। ज्यादातर लोग छोटी-छोटी बात पर गुस्सा हो जाते हैं। आजकल राह चलते जगह-जगह पर झगड़े होते दिखाई देते हैं। कई बार तो लोग इस तरह की झड़प में अपनी जान भी गवां देते हैं। अगर आप भी अपने या अपने किसी प्रियजन के गुस्से से परेशान हैं, तो यह लेख आपको जरूर पढ़ना चाहिए। सबसे पहले तो आप यह समझ लें कि गुस्सा ताकत की नहीं, कमजोरी की निशानी है। 

गुस्‍से का परिणाम खराब: यह बात और अच्‍छी तरह समझने के लिए यहां मैं अपने कुछ अनुभव आपसे साझा कर रहा हूं। मुझे कई बार जेल में जाकर सेमिनार करने का मौका मिला। मुझे जेल में बंद लोगों में से ज्यादातर लोगों ने कहा कि अगर हम अपने गुस्से पर कुछ मिनट के लिए काबू कर लेते, तो हम यहां नहीं होते। हमारा जीवन कुछ और होता। अगर हम सब यह याद रखें कि गुस्से का परिणाम कितना खराब हो सकता है तो शायद गुस्सा न करें। आज कहीं न कहीं हमारी भागदौड़ की जिंदगी में हमको हर काम में जल्दी परिणाम चाहिए। हमको सब्र तो है ही नहीं। ऐसे में मेरे एक मित्र जो कि ज्योतिषी हैं, उन्होंने एक किस्सा सुनाया जो इस प्रकार है। एक सेठजी उनके पास आये वह बहुत गुस्से में थे और बोले मेरी पत्‍नी में बहुत कमियां हैं, वह अपने भाई जो कि उनके साथ में बिजनेस भी करता था उससे भी गुस्सा थे और सबसे ज्यादा तो वह आफिस के कर्मचारियों से गुस्सा थे कि कोई भी ठीक से काम नहीं करता।

ज्योतिषी ने उनसे अपनी जन्‍म पत्री दिखाने को कहा। पत्री देखकर उन्‍होंने कहा- सेठजी आपको मैं क्या बताऊं, आपका तो अगले महीने स्वर्गवास होने वाला है। आपकी पत्री तो यही कह रही है। सेठ जी उदास होकर चले गए। एक हफ्ते के बाद वह वापस आये और बोले-मैं उस दिन आपको बिना पैसे दिए चला गया था। आपको कितने पैसे मुझे देने हैं कृपया बताएं। ज्योतिषी ने कहा- पैसे की बात छोड़ें और बताएं सब कैसा चल रहा है। सेठजी बोले इस एक हफ्ते में मुझे पता चला कि मेरी पत्‍नी तो मुझे बहुत प्यार करती है और मेरी चिंता भी करती है कि मैं मीठा न खाऊं, क्योंकि मुझे मधुमेह की बीमारी है। वह मुझे रोज घूमने के लिए कहती है जो कि डाक्टर ने कहा है। मैं उसको गलत समझता रहा। मैं हमेशा उस पर ही गुस्सा करता रहा। मेरा भाई भी मेरा बहुत सम्मान करता है। वह तो लक्ष्‍मण की तरह है। बस अपने गुस्से के कारण मैं ही राम न बन सका। आफिस के कर्मचारी भी ठीक ही हैं, मेरी ही गलती थी कि मैं हमेशा उनकी कमियां ही देखता था बस। ज्योतिषी ने कहा- मैंने आपसे झूठ कहा था कि आपका स्वर्गवास होने वाला है, जबकि ऐसा कुछ नहीं है। यह तो मैंने आपको गुस्से पर काबू पाने के लिए कहा था। कृपया इस झूठ के लिए मुझे माफ कर दीजिएगा। इसी तरह आज अगर मनुष्य मरना याद रखे तो किसी से गुस्सा या व्यर्थ झगड़ा नहीं करेगा।

रोजाना करें यह उपाय: असल में होता क्या है कि जब हम छोटे बच्‍चे होते हैं तो अपनी बात मनवाने के लिए या दूसरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए गुस्से में तरह-तरह से हाथ-पैर पटकते हैं। रोते भी हैं, तो कई बार हमारी यह आदत बड़े होने पर भी हमारे अंदर बरकरार रहती है। मैं तो जब भी किसी को गुस्से में देखता हूं तो मुझे तरस आता है। अगर आप भी गुस्से से परेशान हैं, तो आप पानी का सेवन थोड़ा बढ़ा दें , प्राणायाम, मेडिटेशन करना शुरू करें। सुबह-शाम अगर आप 15 मिनट मेडिटेशन करना शुरू कर दें, तो आपको अच्‍छी नींद भी आएगी और गुस्सा भी कम आएगा। और तो और, शांति का भी अनुभव करेंगे।

[डा. अनिल सेठी, मोटिवेटर एवं लाइफ कोच]

Edited By Sanjay Pokhriyal

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