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यूपी में परीक्षा देने वाले सभी 45,000 शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक नियुक्त किया जाए, सुप्रीम कोर्ट में दलील

उत्‍तर प्रदेश के शिक्षामित्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई है कि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में बैठे करीब 45000 शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक नियुक्त किया जाए।

Krishna Bihari SinghSat, 25 Jul 2020 07:31 AM (IST)
यूपी में परीक्षा देने वाले सभी 45,000 शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक नियुक्त किया जाए, सुप्रीम कोर्ट में दलील

नई दिल्ली, जेएनएन। उत्‍तर प्रदेश के शिक्षामित्रों की ओर से शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में बैठे करीब 45000 शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षक नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि सभी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास की है। यह भी दलील दी गई कि 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए जो ये पद निकाले गए हैं, ये सहायक शिक्षक के तौर पर नियमित हुए 1,37,500 शिक्षामित्रों को वापस शिक्षामित्र बनाये जाने से सृजित हुए हैं, इसलिए इन पदों पर शिक्षामित्रों का ही अधिकार बनता है।

यूपी सरकार का विरोध

हालांकि बीएड और बीटीसी अभ्यर्थियों तथा उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों की याचिका का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला उत्तर प्रदेश में सहायक शिक्षकों के 69,000 पदों पर भर्ती का है। शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर भर्ती परीक्षा में न्यूनतम योग्यता अंक सामान्य वर्ग के लिए 65 फीसद और आरक्षित वर्ग के लिए 60 फीसद रखे जाने को चुनौती दी है। उनकी मांग है कि न्यूनतम योग्यता अंक पूर्व भर्ती परीक्षा की तरह 45 और 40 फीसद ही होने चाहिए।

शिक्षामित्रों की ओर से यह दलील

सुप्रीम कोर्ट में शिक्षामित्रों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 25 जुलाई 2017 को आनंद कुमार यादव के केस में फैसला देते हुए शिक्षामित्र से सहायक शिक्षक पद पर नियमित हुए 1,37,500 शिक्षामित्रों का नियमन रद कर दिया था। उस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछली बार 68,500 और इस बार 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती निकाली है। दोनों भर्तियों को अगर मिलाया जाए तो कुल वही पद हैं जो शिक्षामित्रों से खाली हुए हैं।

सहायक शिक्षक नियुक्त किया जाए

धवन ने कहा कि तब शिक्षामित्रों की भर्ती इसलिए रद हुई थी कि वे टीईटी पास नहीं थे, अब एटीआर परीक्षा में बैठे सभी लगभग 45000 शिक्षामित्रों टीईटी पास कर लिया है। ऐसे में उन सभी को सहायक शिक्षक नियुक्त किया जाना चाहिए। शेष सीटों पर अभ्यर्थियों की मेरिट तय होनी चाहिए। लेकिन बीएड अभ्यर्थियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने इन दलील का विरोध किया।

एनसीटीई के नियम का पालन जरूरी

हरीश साल्वे ने कहा कि उस फैसले में शिक्षामित्रों की नियुक्ति रद करते हुए कोर्ट ने कहा था कि इन्हें बिना खुली भर्ती और स्पर्धा के नियुक्ति दी गई है जो कि समानता का अधिकार का उल्लंघन है। साल्वे ने कहा कि इसलिए वे 1,37,500 पद आम अभ्यर्थियों के थे न कि शिक्षामित्रों के। बीएड को भर्ती में शामिल करने की तरफदारी करते हुए साल्वे ने कहा कि रूल एनसीटीई ने बनाया है और उसका पालन करना राज्यों के लिए जरूरी है।

सरकार ने यह दी दलील

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से ऐश्वर्या भाटी और राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि सरकार को शिक्षामित्रों का विरोधी बताया जा रहा जबकि ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने आनंद कुमार केस में शिक्षामित्रों को भर्ती में शामिल होने के लिए उम्र और भारांक की छूट दी थी। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के लिए सबसे अधिक भारांक तय किया है। कोर्ट ने ही गत जनवरी में भोला प्रसाद के केस में सुझाव दिया था कि शिक्षामित्रों को चार वर्ष के अनुभव पर भारांक का एक अंक दिया जाना चाहिए जबकि सरकार ने इस मामले में शिक्षामित्रों को एक साल के अनुभव पर ढाई अंक का भारांक दिया है। कोई भी शिक्षामित्र दस वर्ष से कम अनुभव का नहीं है इसलिए अधिकतम 25 भारांक तय हैं। 

Edited By: Krishna Bihari Singh

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