भीमा-कोरेगांव के आरोपित को बचा रहे हैं पीएम: प्रकाश आंबेडकर

आंबेडकर ने कहा कि जनता के सामने सबको झुकना पड़ता है, और हम जानते हैं कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को आम जनता के सामने कैसे झुकाया जाए।

BabitaPublish: Tue, 27 Mar 2018 11:08 AM (IST)Updated: Tue, 27 Mar 2018 11:08 AM (IST)
भीमा-कोरेगांव के आरोपित को बचा रहे हैं पीएम: प्रकाश आंबेडकर

मुंबई, राज्य ब्यूरो। महाराष्ट्र के दलित नेता प्रकाश आंबेडकर का आरोप है कि एक जनवरी को हुई भीमाकोरे गांव हिंसा के आरोपित संभाजी भिड़े उर्फ गुरुजी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचा रहे हैं। उनकी शह के कारण ही भिड़े की गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है।

डॉ. भीमराव आंबेडकर के पौत्र एवं राजनीतिक दल भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने सोमवार को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में दलितों के यलगार मोर्चा को संबोधित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री पर हमला करते हुए कहा कि दक्षिणपंथी हिंदू नेता संभाजी भिड़े को इसलिए गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनको प्रधानमंत्री मोदी अपना गुरु मानते हैं। हमें प्रधानमंत्री से लडऩे में कोई रुचि नहीं है, लेकिन भिड़े के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो उचित समय आने पर हमें क्या करना है, यह हम जानते हैं। आंबेडकर ने कहा कि जनता के सामने सबको झुकना पड़ता है, और हम जानते हैं कि मुख्यमंत्री  और प्रधानमंत्री को आम जनता के सामने कैसे झुकाया जाए। 

आंबेडकर ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के अंदर कानून का पालन करते हुए भिड़े को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हम अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने सवाल किया कि कानून सबके लिए समान क्यों नहीं है? उनका इशारा कुछ दिनों पहले ही गिरफ्तार किए गए एक और हिंदुत्ववादी नेता मिलिंद एकबोटे की ओर था।

इसी वर्ष एक जनवरी को पुणे के भीमाकोरेगांव में 200 साल पुराने युद्ध स्मारक पर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद मिलिंद एकबोटे एवं संभाजी भिड़े के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद एकबोटे की गिरफ्तारी हो चुकी है। बता दें कि भीमाकोरेगांव हिंसा के बाद तीन जनवरी को प्रकाश आंबेडकर के आह्वान पर महाराष्ट्र बंद रहा था। इस बंद के दौरान बड़े पैमाने पर निजी एवं सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था।

भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद प्रकाश आंबेडकर को सूबे की दलित राजनीति में एक नया उभार मिलता दिखाई दे रहा है। पिछले 25 वर्षों से महाराष्ट्र की दलित राजनीति में रामदास आठवले की तूती बोलती रही है। करीब दो दशक तक कांग्रेस-राकांपा के साथ मिलकर राजनीति करते रहे आठवले पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा के करीब आ चुके हैं। महाराष्ट्र का नवबौद्ध दलित समुदाय दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी दलों का विरोधी रहा है। प्रकाश आंबेडकर समुदाय की इसी प्रकृति का लाभ उठाकर निकट भविष्य में अपनी सियासत चमकाना चाहते हैं।

Edited By Babita

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