जानें - आखिर शरीर में कब तक मौजूद रहती है एंटीबॉडी, एक शोध में हुआ दिलचस्‍प खुलासा

दुनिया के कई हिस्‍सों में लोग इस बात को जानने के लिए उत्‍सुक हैं कि कोरोना संक्रमित होने के बाद उनके शरीर में बनी एंटीबॉडी आखिर कब तक बनी रहेंगी। इसका जवाब एक शोध के जरिए सामने आया है।

Kamal VermaThu, 22 Jul 2021 02:47 PM (IST)
शरीर में करीब नौ माह तक बनी रहती हैं एंटीबॉडी

लंदन (पीटीआई)। जब से कोरोना महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में लिया है तब से ही एक शब्‍द का जिक्र काफी हुआ है। ये शब्‍द है एंटीबॉडी। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर ये क्‍या है और कोरोना की चपेट में आने के बाद आखिर कोरोना की चपेट में आने के बाद ये एंटीबॉडी कब तक शरीर में प्रभावी रहती हैं। वैज्ञानिक और जानकार यूं तो कई बार इस बात का जवाब देते रहे हैं। इसको लेकर पूरी दुनिया में कई शोध भी हुए हैं। इसी तरह का एक शोध हाल में इटली में हुआ है। इस शोध के आंकड़े बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के बाद शरीर में करीब नौ माह तक एंटीबॉडीज मौजूद रहती हैं।

एंटीबाडी को लेकर की गई इस रिसर्च में दावा किया गया है कि नौ महीने बाद भी शरीर में अच्‍छी खासी एंटीबॉडी रहती हैं। आपको बता दें कि वायरस के हमले के बाद शरीर स्‍वत: ही एंटीबॉडी का निर्मार्ण करता है। ये एंटीबॉडी शरीर में वारयस के प्रभाव को खत्‍म करने या उससे बचाने में हमारी मदद करती हैं। हाल की रिसर्च में ये भी सामने आया है कि एंटीबॉडी कोरोना के लक्षण वालों और बिना लक्षण वाले शरीर में भी पाई गई हैं।

ये शोध इस लिहाज से काफी खास है। शोधकर्ताओं ने ये निष्‍कर्ष एक इतालवी कस्बे से मिले आंकड़ों के आधार पर निकाला है। आपको बता दें कि पिछले वर्ष फरवरी और मार्च के दौरान इटली की पादुआ यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन के इंपीरियल कालेज लंदन की रिसर्च टीम ने तीन हजार लोगों पर इस शोध को अंजाम दिया था। इसके तहत करीब 85 फीसद से अधिक लोगों का कोरोना टेस्‍ट किया गया था।

इसके कुछ माह बाद मई और फिर नवंबर में इन लोगों का दोबारा टेस्‍ट किया गया था। इस टेस्‍ट का मकसद शरीर में मौजूद एंटीबॉडी का पता लगाना था। ये शोध नेचर कम्युनिकेशंस मैग्‍जीन में पब्लिश हुआ है। इस शोध में ये बात सामने आई कि फरवरी और मार्च में कोरोना से पीडि़त करीब 98.8 फीसद लोगों में नवंबर में भी एंटीबाडी पाई गई। शोध के दौरान लक्षण और बिना लक्षण वाले मरीजों में एंटीबॉडी को लेकर कुछ खास अंतर भी नहीं पाया गया। इस शोध के बारे में जानकारी देते हुए इंपीरियल कालेज लंदन की शोधकर्ता इलारिया डोरिगटी ने बताया कि इससे ये पता चलता है कि इम्यून रेस्‍पांस क्षमता लक्षणों और संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर नहीं होती है।

 

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.