स्मरण शक्ति बढ़ाने की खोजी राह, मस्तिष्क से जुड़ी अन्य बीमारियों का भी हो सकेगा बेहतर इलाज

ताजा अध्ययन इंटरनेशनल बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी सोसई हेप्टारेस के सहयोग से किया गया है। इसके तहत खास रिसेप्टर न्यूरोट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन की पहचान की गई है जो मेमोरी सíकट के जरिये प्रवाहित होकर सूचनाओं के लिए मार्ग निर्धारित करता है।

Dhyanendra Singh ChauhanSat, 18 Sep 2021 08:30 PM (IST)
याददाश्त की एन्कोडिंग बढ़ाने वाली दवा विकसित करने का दावा

ब्रिस्टल (ब्रिटेन), एएनआइ। स्मरण शक्ति बढ़ाने को लेकर कई तरह के प्रयास किए जाते रहे हैं। दुनियाभर के विज्ञानी भी मस्तिष्क के इस रहस्य को समझने और इससे संबंधित अन्य विकारों के इलाज की खोज में जुटे हुए हैं। अब विज्ञानियों ने न्यूरल सर्किट को लक्षित कर एक दवा तैयार की है, जो याददाश्त को एन्कोड कर सकती है और इससे मस्तिष्क से संबंधित अन्य बीमारियों का बेहतर इलाज का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह नई खोज यूनिवर्सिटी आफ ब्रिस्टल के विज्ञानियों ने किया है। यह शोध नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

बता दें कि अधिकांश तंत्रिका तथा मनोवैज्ञानिक विकारों में स्मरण शक्ति का कमजोर पड़ना मुख्य लक्षण होता है। अल्जाइमर और सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों में भी यही होता है। इस तरह से स्मृति लोप की बीमारियों का इलाज अब तक बहुत ही सीमित है। इसीलिए बेहतर और सुरक्षित इलाज की खोज अनवरत जारी है, लेकिन इस दिशा में सीमित सफलता ही मिली है।

खास रिसेप्टर न्यूरोट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन की पहचान की गई

ताजा अध्ययन इंटरनेशनल बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी सोसई हेप्टारेस के सहयोग से किया गया है। इसके तहत खास रिसेप्टर न्यूरोट्रांसमीटर एसिटाइलकोलाइन की पहचान की गई है, जो मेमोरी सर्किट के जरिये प्रवाहित होकर सूचनाओं के लिए मार्ग निर्धारित करता है। एसिटाइलकोलाइन सीखने के दौरान मस्तिष्क में स्त्रावित होता है और नई यादों या स्मृतियों को हासिल करने में महत्वपूर्ण है।

याद या स्मरण की कमजोरी वाले अल्जाइमर रोग या उसके लक्षण का जो इलाज उपलब्ध है, उसमें ऐसी दवाइयों का प्रयोग किया जाता है, जो एसिटाइलकोलाइन को बढ़ाता है। लेकिन इसके कई दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। इस कारण खास रिसेप्टर टारगेट की खोज का सकारात्मक असर होगा और इलाज के दुष्प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।

मस्तिष्क में याद या स्मरण के एन्कोडिंग की बुनियादी प्रक्रियाओं से संबंधित है ये निष्कर्ष

यूनिवर्सिटी आफ ब्रिस्टल के सेंटर फार सिनैप्टिक प्लास्टिसिटी के प्रोफेसर और इस शोध के मुख्य लेखक जैक मेलोर ने बताया- ये निष्कर्ष मस्तिष्क में याद या स्मरण के एन्कोडिंग की बुनियादी प्रक्रियाओं से संबंधित है कि ये मस्तिष्क में किस प्रकार से नियंत्रित होते हैं या फिर कोई दवा किस प्रकार से खास रिसेप्टर प्रोटीन को लक्षित कर सकेगी।

आने वाले समय में खास तरह के लक्ष्य की यह खोज अल्जाइमर जैसे रोगों के लक्षणों के उभरने पर इलाज की नई राह खोल सकती है। इसके अलावा अन्य संज्ञानात्मक कमजोरी वाले विकारों का भी बेहतर इलाज मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इस खोज में अकादमिक तथा औद्योगिक सहयोग बहुत अहम है और हमें उम्मीद है कि इस परियोजना के लिए एकसाथ काम जारी रहेगा।

अल्जाइमर तथा तंत्रिका संबंधी अन्य रोगियों में याददाश्त बढ़ाने की है प्रचुर क्षमता

सोसई हेप्टारेस के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी डाक्टर माइल्स कांग्रेव ने बताया कि इस महत्वपूर्ण अध्ययन ने हमें निदान के ऐसे लक्षित एजेंट खोजने तथा उसकी डिजाइन में मदद की है, जो आभासी तौर पर एसिटाइलकोलाइन का असर पैदा करता है और इसमें पहले उपलब्ध इलाज में होने वाले दुष्प्रभाव भी देखने में नहीं मिले हैं। इसलिए, इस तरीके से अल्जाइमर तथा तंत्रिका संबंधी अन्य रोगियों में संज्ञानात्मक प्रक्रिया को सुदृढ़ करने तथा याददाश्त बढ़ाने की प्रचुर क्षमता है।

यह भी जानना बड़ा दिलचस्प है कि मस्तिष्क किस प्रकार से विभिन्न सूचनाओं को याद रखने की दृष्टि से प्राथमिकता तय करता है और किसे बिना एन्कोड किए खारिज कर देता है। हम यह तो जानते हैं कि यह अहम प्रक्रिया होती है, लेकिन उसके बारे में जानकारी बहुत कम है।

भविष्य में यह जानने की कोशिश होगी कि मस्तिष्क किस प्रकार से अन्य न्यूरोट्रांसमीटर जैसे कि डोपामाइन, सेरोटोनिन और नोरएड्रेनेलाइन के साथ मिलकर एसिटाइलकोलाइन का उपयोग करता है।

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