चीन के खिलाफ खड़ा हुआ जी-7, कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगाने के लिए डब्ल्यूएचओ से जांच का दबाव बढ़ाया

G-7 Summit कनाडा फ्रांस जर्मनी इटली जापान ब्रिटेन और अमेरिका के संगठन जी-7 की बैठक में इन शक्तिशाली देशों के नेताओं ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि चीन के खिलाफ कैसे एकीकृत रुख अपनाया जाए।

Dhyanendra Singh ChauhanSun, 13 Jun 2021 10:19 PM (IST)
जी-7 में चीन के लिए बेहद संवेदनशील कुछ मसलों का किया गया उल्लेख

कार्बिस बे (इंग्लैंड), एजेंसियां। कोरोना महामारी की वजह से दुनियाभर में हाहाकार से उपजे आक्रोश के कारण दुनिया के शक्तिशाली देशों ने चीन को अब चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। जी-7 की बैठक में चीन से साफ तौर पर कहा गया है कि वह कोरोना वायरस के स्रोत का पता लगाने की जांच में मदद करे। इसके अलावा चीन को उसके शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकारों के हनन के लिए लताड़ा गया और हांगकांग में उच्च स्तर की स्वायत्तता का भी आहान किया गया।

कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के संगठन जी-7 की बैठक में इन शक्तिशाली देशों के नेताओं ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि चीन के खिलाफ कैसे एकीकृत रुख अपनाया जाए। इस पर चर्चा के बाद उन्होंने एक बेहद अहम अंतिम विज्ञप्ति जारी की जिसमें ताइवान समेत चीन के लिए बेहद संवेदनशील कुछ मसलों का उल्लेख किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन को मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में किया पेश

दरअसल, विश्व पटल पर चीन के उभार ने अमेरिका को भी बेचैन कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने चीन को मुख्य रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश किया है और चीन के आर्थिक शोषण का सामना करने और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर उसे घेरने का संकल्प लिया है। जी-7 की ओर से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, 'हम अपने मूल्यों को बढ़ावा देते हैं जिसमें चीन द्वारा मानवाधिकारों और मूलभूत आजादी का सम्मान शामिल है, खासकर शिनजियांग प्रांत के संबंध में। साथ ही हांगकांग के लिए भी चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा के मुताबिक इन्हीं अधिकारों, आजादी और उच्च स्तर की स्वायत्तता का आहान करते हैं।'

इसमें आगे कहा गया है, 'हम चीन में कोरोना वायरस के उद्गम का पता लगाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के सौजन्य से दूसरे चरण के समयबद्ध, पारदर्शी, विशेषज्ञों के नेतृत्व वाले और विज्ञान आधारित अध्ययन का भी आहान करते हैं जिसकी सिफारिश विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में की है।'

विज्ञप्ति में कहा गया है, 'वे ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता के महत्व को रेखांकित करते हैं और जलडमरूमध्य के मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करते हैं। हम पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति के बारे में बेहद चिंतित हैं और यथास्थिति को बदलने और तनाव बढ़ाने के किसी भी एकतरफा प्रयास का कड़ा विरोध करते हैं।'

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बंधुआ मजदूरों के बारे में चिंतित है जी-7

जी-7 ने कहा कि वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बंधुआ मजदूरी के बारे में चिंतित है जिनमें कृषि, सौर और वस्त्र सेक्टर शामिल है। चीन बार-बार यह मुद्दा उठाए जाने का विरोध करता रहा है। उसका कहना है कि यह पश्चिमी ताकतों की चीन को रोकने की कोशिश है। उसका कहना है कि वर्षो तक चीन नीचा दिखाने के बाद दुनिया की कई बड़ी ताकतें अभी भी पुरानी शाही मानसिकता से ग्रसित हैं। संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों का अनुमान है कि हाल के वर्षो में शिनजियांग के शिविरों में 10 लाख से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनमें अधिकतर उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं।

दुनिया के छोटे समूह से निर्देशित होने के दिन गए : चीन

चीन ने रविवार को जी-7 पर निशाना साधते हुए कहा कि वे दिन काफी समय पहले लद गए जब वैश्विक फैसले देशों के छोटे समूह द्वारा निर्देशित होते थे।

चीन सरकार ने हालांकि सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की, लेकिन चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लंदन स्थित चीनी दूतावास द्वारा जारी बयान का हवाला दिया। इस बयान में कहा गया है कि दुनिया में सिर्फ एक व्यवस्था है, अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था जिसका नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र करता है। बयान के मुताबिक, 'हमारा हमेशा से मानना रहा है कि बड़े, छोटे, शक्तिशाली, कमजोर, गरीब या अमीर सभी देश समान हैं और वैश्विक मामलों का निपटारा सभी देशों के बीच विचार-विमर्श से किया जाना चाहिए।'

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