ब्रेक्जिट के चलते ब्रिटेन, EU को होगा नुकसान, अमेरिका और चीन को हो सकता है फायदा!

नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। यूरोपियन यूनियन इस बात पर राजी हो गया है कि ब्रिटेन को ब्रेक्जिट के लिए और समय दिया जाना चाहिए। ब्रिटेन ने इसके लिए ईयू से 30 जून तक का समय मांगा था। इससे पहले ब्रिटेन को ईयू से बाहर होने के लिए 29 मार्च तक का समय था। ब्रिटेन की पीएम थेरेसा मे के आग्रह पर ईयू ने ब्रिटेन को आखिरी लाइफ लाइन दी है। इसका मकसद ईयू से अलग होने की शर्तें तैयार करना है। हालांकि थेरेसा ब्रिटेन की संसद में दो बार शर्तों का प्रस्‍ताव लेकर आई थीं, लेकिन सदन में इनपर सहमति नहीं बन पाई। इसकी वजह से ब्रिटेन के ईयू से बिना शर्त निकलने का संकट खड़ा हो गया था। बहरहाल, ब्रिटेन में इसको लेकर सदन के बाहर और अंदर काफी असमंजस की स्थिति है। लेकिन इन सभी के बीच यह बात आशंका भी घर करने लगी है कि ब्रेक्जिट के बाद न सिर्फ ब्रिटेन बल्कि यूरोपियन यूनियन को आर्थिक तौर पर काफी नुकसान होने वाला है। यह नुकसान अरबों डालर का भी हो सकता है।

शोध में सामने आई बात
जर्मनी के बैर्टेल्समन फाउंडेशन की स्टडी के मुताबिक यदि ब्रिटेन बिना किसी समझौते के यूरोपियन यूनियन से बाहर होता है तो इसका असर भी व्‍यापक होगा। इस वजह से इसको हाई ब्रेक्जिट का नाम दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ यदि सहमति के बाद वह ईयू से बाहर होता है तो यह सॉफ्ट ब्रेक्जिट होगा। हाई ब्रेक्जिट की सूरत में ब्रिटेन की सालाना आय में करीब 40 अरब यूरो का नुकसान हो सकता है। वहीं ब्रिटेन में रहने वालों की आय में सालाना करीब 57 अरब यूरो या प्रति व्यक्ति 873 यूरो की कमी आ सकती है।

ये है वजह
स्‍टडी में जिस तर्ज पर नुकसान का जायजा लिया गया है उसकी बड़ी वजह ब्रेक्जिट के कारण चीजों और सेवाओं पर टैरिफ बताया गया है। आपको बता दें कि यूरोपियन यूनियन के सिंगल मार्केट सिस्टम में कोई टैरिफ नहीं लगता है। वहीं ब्रिटेन के ईयू में रहने से वह गुड्स एंड सर्विसेज के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा से बचा रहता है। ब्रेक्जिट के बाद चीजों के दाम ऊपर जा सकते हैं और लोगों की आय में भी कमी आ सकती है।

किसे नुकसान, किसे फायदा
स्‍टडी के मुताबिक साफ्ट ब्रेक्जिट के कारण सभी पक्षों को कम नुकसान झेलना पड़ेगा। इससे यूरोपीय संघ के बाकी देशों को होने वाला अनुमानित घाटा करीब आधा हो जाएगा। स्‍टडी की मानें तो इससे जर्मनों की आय में आने वाली सामान्य कमी भी घट कर पांच अरब यूरो और ब्रिटेन के नागरिकों की आय में कमी करीब 32 अरब यूरो के आसपास हो जाएगी। इस शोध में एक अहम बात निकलकर सामने आई है। इसके मुताबिक हाई ब्रेक्जिट होने पर अमेरिका, रूस और चीन की आय बढ़ सकती है। हाई ब्रेक्जिट की सूरत में जहां अमेरिका के लोगों की सालाना आय में करीब 13 अरब यूरो और चीन में करीब पांच अरब यूरो की सालाना आय बढ़ सकती है। वहीं रूस की सालाना आय में 26 करोड़ यूरो की बढ़त हो सकती है।

हाई ब्रेक्जिट से झटका
हार्ड ब्रेक्जिट से सबसे बड़ा झटका जर्मनी और फ्रांस को लग सकता है। शोध के मुताबिक यहां के लोगों को हर साल इससे करीब 10 अरब यूरो का घाटा झेलना पड़ सकता है। इतना ही नहीं जर्मनी के दक्षिणी राज्यों जैसे बवेरिया, बाडेन वुर्टेमबैर्ग और पश्चिमी राज्य नार्थ राइन वेस्टफेलिया के औद्योगिक और निर्यात केंद्र बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। दरअसल, इन देशों को होने वाले घाटे की सबसे बड़ी वजह इनका निर्यात पर अधिक निर्भरता है। आपको बता दें कि वर्ष 2017 में जर्मनी को जिन देशों ने सबसे अधिक निर्यात किया था उसके टॉप फाइव देशों में ब्रिटेन शामिल था।

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