नए ब्रेक्जिट समझौते पर ब्रिटेन की संसद में फैसला आज, पीएम जॉनसन के भाग्य का भी होगा फैसला

लंदन, एपी। ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में शनिवार को प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और ईयू के साथ उनकी सरकार द्वारा किए गए नए ब्रेक्जिट समझौते दोनों के भाग्य का फैसला होना है। अगर नए ब्रेक्जिट समझौते पर संसद की मुहर लग जाती है तो जॉनसन का नाम ब्रेक्जिट को सफल बनाने वाले नेता के रूप में इतिहास में दर्ज हो जाएगा।

ब्रिटेन तय तारीख को ईयू से अलग हो जाएगा

साथ ही ब्रिटेन भी तय तारीख 31 अक्टूबर को ईयू से अलग हो जाएगा। लेकिन समझौता खारिज होता है तो जॉनसन को न सिर्फ शर्मिदगी का सामना करना पड़ेगा, बल्कि न चाहते हुए भी ब्रेक्जिट के लिए ईयू से और समय के लिए गुहार लगाने पड़ेगी।

जॉनसन नए समझौते को अाज संसद में पेश करेंगे

बोरिस जॉनसन नए समझौते को शनिवार को हाउस ऑफ कॉमंस में पेश करेंगे। 650 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 318 सदस्यों की जरूरत है। जबकि, सत्तारूढ़ कंजरवेटिव पार्टी के पास 244 सदस्य ही हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ पार्टी को दूसरे दलों के समर्थन की जरूरत है। जॉनसन और उनकी पूरी टीम शुक्रवार को सांसदों को समझाने में जुटी रही।

विदेश मंत्री ने समझौते के समर्थन के लिए मुहिम की शुरुआत की

विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने समझौते के समर्थन के लिए मुहिम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि जनमत संग्रह की भावना को पूरा करने का असली अवसर अब मिला है। लेकिन सरकार की सहयोगी उत्तरी आयरलैंड की डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी) ने नए समझौते को खारिज कर दिया है। पर राब ने उम्मीद जताई कि डीयूपी सरकार का समर्थन करेगी।

उत्तरी आयरलैंड को विशेष दर्जा

डीयूपी के ब्रेक्जिट प्रवक्ता सैमी विल्सन ने कहा कि जॉनसन ने जो समझौता किया है वह उनके क्षेत्र के लिए ठीक नहीं है। नए समझौते में ईयू के सदस्य आयरलैंड के साथ खुली सीमा रखने के लिए उत्तरी आयरलैंड को विशेष दर्जा दिया गया है।

जॉनसन की नजर कंजरवेटिव पार्टी और लेबर पार्टी पर टिकी

जॉनसन और उनकी टीम की नजर पिछले साल कंजरवेटिव पार्टी से निलंबित किए गए 21 सदस्यों और 244 सदस्यों वाली मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी पर टिकी है। 21 सदस्यों में से एक निकोलस सोएम्स ने कहा कि उनके साथ ही ज्यादातर सदस्य समझौते के पक्ष में मतदान करेंगे।

ब्रेक्जिट में और देरी नहीं चाहता फ्रांस

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि उनका देश नहीं चाहता कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने में देरी हो। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर की तारीख का पालन किया जाना चाहिए। अब इसमें और देरी नहीं होनी चाहिए।

ब्रेक्जिट के नए समझौते को अगर ब्रिटिश संसद खारिज कर देती है तो बोरिस जॉनसन को ईयू से और समय की मांग करनी पडेगी। यूरोपीय परिषद के प्रमुख डोनाल्ड टस्क ने कहा कि ऐसी स्थिति में वह ईयू के नेताओं से बातचीत करेंगे।

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