रूस स्पूतनिक-5 को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बना, तीसरे चरण के क्लीनिकल ​​परीक्षणों में 91.4 फीसद प्रभावी

रूस कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक-5 को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

रूस की कोरोनावायरस वैक्सीन स्पूतनिक-5 क्लीनिकल ​​परीक्षणों के अंतिम नियंत्रण बिंदु के डेटा विश्लेषण के आधार पर 91.4 प्रतिशत की प्रभावकारिता को दर्शाता है। रूस कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक-5 को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

Publish Date:Mon, 14 Dec 2020 11:57 PM (IST) Author: Bhupendra Singh

मास्को, एएनआई। रूस की कोरोनावायरस वैक्सीन स्पूतनिक-5 क्लीनिकल ​​परीक्षणों के अंतिम नियंत्रण बिंदु के डेटा विश्लेषण के आधार पर 91.4 प्रतिशत की प्रभावकारिता को दर्शाता है। रूस कोविड-19 वैक्सीन स्पूतनिक-5 को मंजूरी देने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

स्पूतनिक-5 की पहली खुराक को देने के 21 दिनों बाद प्राप्त आंकड़ों के अंतिम नियंत्रण बिंदु विश्लेषण ने 91.4 प्रतिशत की प्रभावकारिता की पुष्टि की। गामालेया संस्थान के शोधकर्ताओं ने एक बयान में कहा कि परीक्षण में 22,714 प्रतिभागियों के डेटा पर आधारित परिणाम हैं। समूह के बीच कोविड-19 के 78 पुष्टि किए गए मामलों के बाद परिणाम प्रकाशित किए गए।

गणना 22,714 स्वयंसेवकों के डेटा के विश्लेषण पर आधारित है, जिन्होंने तीसरे चरण के क्लीनिकल ​​परीक्षणों के अनुसार 78 पुष्ट मामलों के तीसरे और अंतिम नियंत्रण बिंदु पर स्पूतनिक-5 वैक्सीन या प्लेसबो की पहली और दूसरी खुराक प्राप्त की थी।

स्पूतनिक-5 की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, तीसरे और अंतिम सांख्यिकीय महत्वपूर्ण प्रतिनिधि नियंत्रण बिंदु पर अग्रिम 90 प्रतिशत से अधिक वैक्सीन की प्रभावकारिता के अंतिम प्रमाण के लिए अनुमति दी गई है।

रूस के नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी और रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष (आरडीआईएफ) ने बुधवार को यह घोषणा की और बताया कि कोरोनावायरस के खिलाफ दुनिया की पहली पंजीकृत वैक्सीन स्पूतनिक-5 ने अध्ययन में काफी प्रभावकारी प्रदर्शन किया है।

यह पुष्टि रूस में सबसे बड़े डबल-ब्लाइंड, रैंडमाइज्ड, प्लेसबो-नियंत्रित फेज-3 क्लीनिकल परीक्षणों में से 40,000 स्वयंसेवकों के पहले अंतरिम आंकड़ों पर आधारित है। कुल 16 हजार स्वयंसेवकों (वॉलंटिअर्स) पर किए गए ट्रायल में वैक्सीन की डोज दी गई थी, जिसके आधार पर यह मूल्यांकन किया गया।

सितंबर में पहली बार वैक्सीन को रूसी अस्पतालों के रेड जोन के स्वयंसेवकों के एक समूह को दिया गया था। इसमें शामिल 10,000 लोगों के टीकाकरण के बाद भी इसकी प्रभावकारिता दर 90 प्रतिशत से अधिक होने की पुष्टि हुई।

प्राप्त आंकड़ों को गामालेया सेंटर के शोधकर्ताओं की ओर से दुनिया के प्रमुख पीयर रिव्यूड मेडिकल एकेडमिक जर्नलों में से एक में प्रकाशित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख महामारी विज्ञान विशेषज्ञों द्वारा डेटा का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा।

रूस के 29 चिकित्सा केंद्रों में चल रहे क्लीनिकल परीक्षणों के हिस्से के रूप में 11 नवंबर तक 20,000 से अधिक स्वयंसेवकों को वैक्सीन की पहली खुराक और 16,000 से अधिक स्वयंसेवकों को पहली और दूसरी खुराक दी गई थी।

इसके अलावा, 11 नवंबर तक अनुसंधान में किसी भी अप्रत्याशित प्रतिकूल घटनाओं की पहचान नहीं की गई है, जो कि एक अच्छा संकेत है। जिन लोगों को वैक्सीन दी गई उनमें से कुछ लोगों को मामूली शिकायतें, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, फ्लू जैसे सिंड्रोम, जिसमें बुखार, कमजोरी, थकान और सिरदर्द आदि ही देखने को मिले हैं।

क्लीनिकल परीक्षणों के दौरान वैक्सीन की सुरक्षा की लगातार निगरानी की गई। जानकारी का विश्लेषण स्वतंत्र निगरानी समिति द्वारा किया जाता है, जिसमें प्रमुख रूसी वैज्ञानिक शामिल होते हैं।

छह महीने तक अध्ययन प्रतिभागियों का अवलोकन जारी रहेगा, जिसके बाद अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। पंजीकरण प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए रूसी वैक्सीन खरीदने के इच्छुक देशों के राष्ट्रीय नियामकों को आरडीआईएफ द्वारा अनुसंधान डेटा प्रदान किया जाएगा।

रूसी संघ के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराशको ने कहा कि वैक्सीन के उपयोग और क्लीनिकल परीक्षणों के परिणामों से पता चलता है कि यह कोरोनावायरस संक्रमण को रोकने के लिए एक कुशल समाधान है और यह महामारी को हराने का सबसे सफल रास्ता है।

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