रूस ने पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने के लिए शुरू किया अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास

मॉस्को, एएफपी/आइएएनएस। रूस ने पश्चिमी देशों को अपनी ताकत दिखाने के लिए मंगलवार से अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास शुरू किया। यह शीतयुद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास बताया जा रहा है। पश्चिमी साइबेरिया क्षेत्र में शुरू हुए इस सैन्य अभ्यास में चीन और मंगोलिया की सेनाएं भी हिस्सा ले रही हैं।

सैन्य अभ्यास को 'वोस्तोक-2018' नाम दिया गया

एक सप्ताह तक चलने वाले इस सैन्य अभ्यास को 'वोस्तोक-2018' नाम दिया गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देश के पश्चिमी शहर व्लादिवोस्तक में आर्थिक फोरम की मेजबानी करने के बाद इस सैन्य अभ्यास को देखने जा सकते हैं। इस आर्थिक फोरम के प्रमुख अतिथियों में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी शामिल हैं।

रूस अपनी रक्षा करने में सक्षम

यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय पर किया जा रहा है जब रूस और पश्चिमी देशों में तनाव बढ़ता जा रहा है। इन देशों ने रूस पर पश्चिमी मामलों में दखल देने का आरोप लगाया है। इसके अलावा यूक्रेन और सीरिया में चल रहे संघर्ष को लेकर भी तनातनी चल रही है। पिछले माह रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने कहा था कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय हालात में रूस अपनी रक्षा करने में सक्षम है।

सैन्य अभ्यास की खासियत

-17 सितंबर तक चलने वाले इस अभ्यास में तीन लाख सैनिकों के साथ 36 हजार सैन्य वाहन शामिल

-एक हजार लड़ाकू विमान और 80 युद्धपोत भी दिखा रहे अपनी ताकत

-समुद्र में कैलिबर मिसाइलों से लैस युद्धपोत तैनात, इन मिसाइलों का सीरिया में हो चुका है इस्तेमाल

नए हथियार भी शामिल

रूस की सेना इस सैन्य अभ्यास में अपने नए हथियारों की ताकत भी दिखाएगी। इस्कंदर मिसाइलों से लक्ष्य को भेदा जाएगा। ये मिसाइलें परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। उन्नत टी-80 और टी-90 टैंकों के अलावा लड़ाकू विमान सुखोई-34 और सुखोई-35 भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे।

सोवियत काल में हुआ था बड़ा सैन्य अभ्यास

रूस की सेना ने इससे पहले सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास सोवियत काल में 1981 में किया था। उस अभ्यास में एक से डेढ़ लाख सैनिकों ने हिस्सा लिया था।

नाटो ने कहा, बड़े संघर्ष की तैयारी

नाटो ने रूस के सैन्य अभ्यास की आलोचना करते हुए इसे बड़े संघर्ष की तैयारी करार दिया है। नाटो प्रवक्ता डायलन ह्वाइट ने हाल में कहा था, 'हम पिछले कुछ समय से रूस का आक्रामक रवैया देख रहे हैं। वह अपना बजट और सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है।' 

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