अफगानिस्तान के घटनाचक्र पर US खुफिया एजेंसी की पूरी नजर, सीआइए प्रमुख ने भारत-पाक से वार्ता की

अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद यहां सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और आइएसआइ प्रमुख फैज हमीद के साथ वार्ता की। वार्ता के संबंध में एक बयान कर जानकारी दी गई। बता दें कि सीआइए के डायरेक्टर विलियम ब‌र्न्स पाकिस्तान और भारत की यात्रा पर हैं।

Ramesh MishraSat, 11 Sep 2021 07:55 PM (IST)
अफगानिस्तान के घटनाचक्र पर US खुफिया एजेंसी की पूरी नजर।

इस्लामाबाद, एजेंसी। अफगानिस्तान की लगातार बदल रही स्थिति पर अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआइए पूरी नजर रखे हुए है। सीआइए के डायरेक्टर विलियम ब‌र्न्स पाकिस्तान और भारत की यात्रा पर हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने पाकिस्तान पहुंचने के बाद यहां सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा और आइएसआइ प्रमुख फैज हमीद के साथ वार्ता की। वार्ता के संबंध में एक बयान कर जानकारी दी गई।

क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के साथ सहयोग कायम

बयान में कहा गया है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पाकिस्तान अपने अंतरराष्ट्रीय पार्टनर के साथ पूरा सहयोग कर रहा है, लेकिन परिस्थितियां इतनी अच्छी नहीं हैं, जितनी समझी जा रही हैं। पाकिस्तान ने अमेरिका के निकासी अभियान में भी पूरी मदद की है। यही नहीं उसने काबुल से आने वाले अमेरिकी सैनिकों को भी अपने यहां ठहराया है। ज्ञात हो कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तुर्की, रूस, कतर, ईरान, चीन और पाकिस्तान निरंतर तालिबान के संपर्क में हैं और उनकी लगातार वार्ता हो रही है। यह अमेरिका के लिए चिंतित करने वाली स्थितियां हैं। बाइडन प्रशासन पहले की कह चुका है कि वह अफगानिस्तान की स्थिति पर बराबर नजर रखे हुए है।

अमेरिका ने कहा, अफगान में हो सकती है भारत की बड़ी भूमिका

उधर, अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय खिलाड़ी और अमेरिका के सहयोगी के रूप में अफगानिस्तान में बड़ी भूमिका हो सकती है। भारत का अफगानिस्तान में भारी निवेश के कारण तालिबान के नियंत्रण वाले देश में भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के संदेश को दोहराया कि अमेरिका ने 11 सितंबर 2001 के हमलों के पीछे अफगानिस्तान में युद्ध ने अल कायदा के आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए अपने केंद्रीय मिशन को हासिल कर लिया है। अब अमेरिका का ध्यान भारत जैसे समान विचारधारा वाले भागीदारों और लोकतंत्रों के साथ काम करने पर है, ताकि अफगानिस्तान के लोगों का समर्थन करने के अगले अध्याय की ओर देखा जा सके।

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