पाकिस्तानी टीवी चैनल पर कार्रवाई, तीस दिन के लिए प्रसारण बंद और दस लाख का जुर्माना

पाकिस्तानी चैनल तीस दिन के लिए प्रतिबंधित

न्याय पालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किए जाने के बाद पाकिस्तान के एक टीवी चैनल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सरकार की मीडिया पर निगरानी करने वाली संस्था ने चैनल का लाइसेंस तीस दिन के लिए निलंबित कर दिया और दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

Publish Date:Sat, 23 Jan 2021 04:34 PM (IST) Author: Monika Minal

इस्लामाबाद, प्रेट्र।  पाकिस्तान में सरकार की मीडिया पर निगरानी करने वाली संस्था ने एक टीवी चैनल का लाइसेंस तीस दिन के लिए निलंबित कर दिया है। चैनल पर दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई एक एंकर की न्याय पालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किए जाने पर की गई।

पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेग्यूलेटरी अथॉरिटी (पीइएमआरए) ने यह कार्रवाई बोल न्यूज के खिलाफ की है। कार्रवाई करते हुए नियामक संस्था ने कहा है कि इस चैनल के एंकर सामी इब्राहिम (Sami Ibrahim) ने 13 जनवरी को प्रसारित कार्यक्रम में लाहौर हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व अन्य न्यायाधीशों पर नियुक्तियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी। संस्था ने कहा है कि जब चैनल को नोटिस दिया गया तो उसने खेद व्यक्त करने के बजाय नोटिस वापस लेने पर जोर डाला। इससे पहले अप्रैल 2019 में लाहौर हाइकोर्ट ने जजों के संबंध में एक अन्य खबर के मामले में भी नोटिस दिया था। 2019 में इस एंकर का प्रधानमंत्री इमरान खान पर एक टॉक शो के कारण विज्ञान मंत्री फवाद चौधरी के साथ विवाद हो चुका है। फवाद चौधरी ने एंकर इब्राहिम को एक विवाह समारोह में थप्पड़ मार दिया था। 

वर्ष 2019 के अक्टूबर माह में जारी आदेश में (PEMRA) ने नियमित शो करने वाले एंकरों को निर्देश दिया था कि वे अपने या दूसरे चैनलों के टॉक शो में 'विशेषज्ञ की तरह पेश न हों।'  साथ ही आदेश में मीडिया हाउसों को यह भी निर्देश दिया कि वे टॉक शो के लिए अतिथि का चयन बेहद सतर्कता से करें। चयन के दौरान उस खास विषय पर उनके ज्ञान और विशेषज्ञता का भी ध्यान रखें। दरअसल, इस्लामाबाद हाई कोर्ट के 26 अक्टूबर के एक आदेश के बाद सभी सेटेलाइट टीवी चैनलों को यह आदेश जारी किया गया। कोर्ट ने शहबाज शरीफ बनाम सरकार के मामले में विभिन्न टीवी टॉक शो पर संज्ञान लिया, जहां एंकरों ने आचार संहिता का उल्लंघन करते हुए न्यायपालिका और उसके फैसलों की छवि खराब करने की कोशिश की। कोर्ट ने ऐसे उल्लंघनों पर पीईएमआरए द्वारा की गई कार्रवाई और सजा पर रिपोर्ट भी मांगी।

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