बलूच विद्रोहियों के हमले में चार पाकिस्‍तानी सैनिकों की मौत, दो घायल, UNHRC के बाहर पाक के खिलाफ प्रदर्शन

अशांत बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तान के अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी मारे गए जबकि दो अन्य घायल हो गए। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।

Krishna Bihari SinghPublish:Sun, 26 Sep 2021 04:15 PM (IST) Updated:Sun, 26 Sep 2021 04:40 PM (IST)
बलूच विद्रोहियों के हमले में चार पाकिस्‍तानी सैनिकों की मौत, दो घायल, UNHRC के बाहर पाक के खिलाफ प्रदर्शन
बलूच विद्रोहियों के हमले में चार पाकिस्‍तानी सैनिकों की मौत, दो घायल, UNHRC के बाहर पाक के खिलाफ प्रदर्शन

इस्‍लामाबाद, एजेंसियां। आतंकियों को पालने वाले पाकिस्‍तान को एकबार फि‍र अपनी करतूतों का खामियाजा भुगतना पड़ा है। एक अधिकारी ने बताया कि देश के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तान के अर्धसैनिक बलों को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी मारे गए जबकि दो अन्य घायल हो गए। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक प्रतिबंधित बलूच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army, BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।

पाकिस्‍तानी अखबार डान के मुताबिक शनिवार को हरनाई जिले के खोसाट इलाके में फ्रंटियर कॉर्प्स (Frontier Corps, FC) के एक वाहन पर हमला किया गया। बताया जाता है कि एफसी (Frontier Corps) के सैनिक जब गश्त कर रहे थे तब उनके वाहन को विस्फोटकों से लदे वाहन ने टक्कर मार दी जिसके परिणामस्वरूप चार सैनिकों की मौत हो गई और दो अन्‍य अधिकारी घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने घायलों को पास के अस्पतालों में पहुंचाया।

बीते शुक्रवार को बलूचिस्तान के आवारन जिले में भी हुए एक हमला हुआ था जिसमें दो सुरक्षाकर्मी मारे गए थे जबकि पांच अन्य घायल हो गए थे। बताया जाता है कि इन हमलों में स्थानीय बलूच राष्ट्रवादी, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और तालिबान के आतंकी शामिल हैं। साल 2019 में अमेरिका ने बीएलए को आतंकी संगठन घोषित किया था। बीएलए बलूचिस्तान की आजादी के लिए पाकिस्तानी सरकार से लड़ रहा है।  

वहीं दूसरी ओर जिनेवा में गुलाम कश्मीर (पीओके) और गिलगित-बाल्टिस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के कार्यालयों के बाहर कई विरोध प्रदर्शन किए। उन्‍होंने पीओके में संचालित आतंकी शिविरों को खत्म करने की मांग की। मानवाधिकार परिषद के 48वें सत्र के दौरान ये विरोध प्रदर्शन यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूपीएनपी), स्विस कश्मीर ह्यूमन राइट्स की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित किए गए थे।