कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तानी HC की फटकार- भारत को स्थिति स्पष्ट करें इमरान खान

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान और कुलभूषण जाधव। (फोटो: दैनिक जागरण)

पाकिस्तान के हाई कोर्ट ने कहा- न्यायिक क्षेत्र का मामला नहीं है जाधव केस। कुलभूषण जाधव मामले को लेकर पाकिस्तान स्थित इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने विदेश कार्यालय को निर्देश दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसले को लागू करने हेतु न्यायाधिकार क्षेत्र के संबंध में भारत को स्थिति स्पष्ट करे।

Shashank PandeyFri, 16 Apr 2021 08:02 AM (IST)

इस्लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान के इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि कुलभूषण जाधव केस की सुनवाई न्यायिक क्षेत्राधिकार का मामला नहीं है। हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से इस संबंध में भारत के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।पाकिस्तान की जेल में बंद भारत के पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव पर वहां की सैन्य अदालत ने जासूसी का आरोप लगाते हुए मौत की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ भारत ने हेग में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आइसीजे) में अपील की थी।

जुलाई, 2019 में आइसीजे अपने फैसले में कहा कि पाकिस्तान को जाधव पर लगे आरोपों व सजा पर पुनर्विचार करना चाहिए और भारत को राजनयिक पहुंच दे। पिछले साल पाकिस्तान सरकार ने विशेष अध्यादेश लाकर इस्लामाबाद हाई कोर्ट में मामला दर्ज कराया। इस्लामाबाद हाई कोर्ट का कहना है कि भारत जाधव के लिए अपना वकील नियुक्त करे। वहीं भारत का कहना है कि जाधव मामला इस्लामाबाद हाई कोर्ट के न्यायिक क्षेत्र में नहीं आता है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला न्यायिक क्षेत्र का नहीं है। अदालत ने आइसीजे के फैसले के क्रियान्वयन के लिए इस मामले को अपने हाथ में लिया है। हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के अधिकारियों से कहा कि इस संबंध में भारत की गलतफहमी को दूर करे।

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने जुलाई 2019 में दिए फैसले में कहा कि पाकिस्तान जाधव को दोषी ठहराने के फैसले और सजा की ‘‘प्रभावी तरीके से समीक्षा और पुनर्विचार करे’’ और साथ ही बिना देरी भारत को राजनयिक पहुंच दे।

इस्लामाबाद हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति अथर मिनाल्लाह, न्यायमूर्ति आमिर फारूक और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब की वृहद पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की खबर के मुताबिक भारतीय उच्चायोग ने वकील के माध्यम से इस्लामाबाद हाई कोर्ट द्वारा मामले में बचाव पक्ष का वकील नियुक्त करने के न्यायाधिकार क्षेत्र को चुनौती दी और अदालत ने आपत्ति पर सफाई देने की कोशिश की।

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