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हर कीमत पर चीन-पाक इकोनामिक कॉरिडोर को पूरा करना चाहता है पाकिस्तान, इमरान खान अड़े

इस्लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार महत्वाकांक्षी परियोजना चीन-पाकिस्तान इकोनामिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को हर कीमत पर पूरा करेगी। 60 बिलियन डालर का यह प्रोजेक्ट चीन-पाकिस्तान की सदाबहार दोस्ती की अभिव्यक्ति है।सीपीईसी प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए इमरान ने कहा कि पाकिस्तान के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए यह सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट है। इससे देश का बेहतर भविष्य निश्चित है।

सीपीईसी अथारिटी के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए पाक प्रधानमंत्री ने कहा कि क्षमता के साथ-साथ कार्यशैली में सुधार के और उपाय किए जाने चाहिए। डान समाचार पत्र ने कहा कि इमरान खान का यह बयान चीनी विदेश मंत्री वांग यी की पाकिस्तानी विदेश मंत्री से फोन पर हुई बातचीत के एक दिन बाद आया है। वांग ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत आनेवाले प्रोजेक्ट में तेजी लाने को कहा था। वांग ने पाकिस्तान में काम कर रही चीनी कंपनियों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा था।

चीन के साथ दोस्ती का पाकिस्तान को दुनिया की आर्थिक महाशक्तियों के गुस्से का शिकार होना प़़ड सकता है। पूर्वी लद्दाख में भारत के साथ टकराव पर आमादा चीन का समर्थन कर रहे पाकिस्तान पर अपनी नीति की समीक्षा करने का दबाव ब़़ढता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री इमरान खान को आगाह किया है कि कोरोना महामारी के दौरान चीन के रवैये और भारत सीमा पर उसकी दादागीरी को लेकर दुनिया की आर्थिक महाशक्तियां ड्रैगन को अलग-थलग करने पर तुली हुई हैं। ऐसे में चीन का सदाबहार दोस्त पाकिस्तान भी कोपभाजन बन सकता है।

चीन से खफा है बलूच व गिलगिट बाल्टिस्तान

बलूच और गिलगिट बाल्टिस्तान के लोगों को स्थानीय नौकरियों से इनकार किया जा रहा है क्योंकि चीनी कंपनियां कम कीमत पर चीन से श्रमिकों को लाकर काम करवा रहे हैं। जाहिर सी बात है कि चीनी कंपनियों को स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं के बारे में जानकारी नहीं है और इसलिए वे स्थानीय लोगों से बिल्कुल अलग हैं और संदेह की दृष्टि से इन्हें देखा जा रहा है। इसके अलावा चीनी सरकार द्वारा उइगर मुसलमानों के साथ क्रूर व्यवहार किए जाने की रिपोर्ट मिल रही है। जो आजकल धार्मिक व्हाट्सएप ग्रुप पर चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। 

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