भारत के आंतरिक मामले में पाक का दखल, असम की घटना पर भारतीय राजनयिक को किया तलब

Pak Summon indian diplomat पाकिस्तान ने मुसलमानों को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए भारत के मामलों के प्रभारी (चार्ज डे अफेयर्स) को विदेश कार्यालय तलब कर असम में अवैध अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने के अभियान पर चिंता व्यक्त क

Monika MinalSat, 25 Sep 2021 01:58 AM (IST)
पाक ने असम की घटना पर भारतीय राजनयिक को तलब किया

इस्लामाबाद, प्रेट्र।  भारत के अंदरूनी मामले में पाकिस्तान ने एक बार फिर अपनी टांग अड़ाई है। पाकिस्तान ने शुक्रवार को भारत के मामलों के प्रभारी (चार्ज डे अफेयर्स) को विदेश कार्यालय तलब कर असम में अवैध अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने के अभियान पर अपनी चिंता व्यक्त की और आरोप लगाया कि राज्य में मुसलमानों को निशाना बनाया गया है।

उल्लेखनीय है असम में गुरुवार को दरांग जिले के सिपाझार राजस्व सर्कल के तहत गोरुखुटी और अन्य गांवों में अतिक्रमणकारियों को हटाने की कोशिश में दो लोगों की मौत हो गई और पुलिसकर्मियों सहित और 20 अन्य घायल हो गए थे। घटना के बाद एक वीडियो सामने आया जिसमें एक कैमरामैन मरे हुए आदमी एक मरे हुए आदमी के सीने पर कूद रहा है। सरकारी जमीन से बेदखल किए गए 800 परिवारों के पुनर्वास की मांग को लेकर विरोध शुरू हो गया, जहां वे अरसे से रह रहे थे।पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि भारतीय राजनयिक से कहा गया कि भारत को हाल ही में असम में मुस्लिम विरोधी हिंसा की जांच करनी चाहिए और अपराधियों को दंडित करना चाहिए। बयान के अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी उपाय करने चाहिए।

गोरुखुटी कांड के पीछे पीएफआइ का हाथ: भाजपा

इस बीच भाजपा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि हो सकता है पापुलर फ्रंट आफ इंडिया सहित कई संगठनों ने प्रदर्शनकारियों को असम पुलिस के जवानों पर हमला करने के लिए उकसाया हो। हालांकि, पीएफआइ की असम इकाई ने इस आरोप को गलत बताया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव दिलीप सैकिया ने भी संकेत दिया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर्याप्त गंभीर नहीं थी।उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, मुझे लगता है कि गुरुवार को पुलिस कार्रवाई बहुत संयमित थी। हालात जिस तरह के थे उस हिसाब से कम से कम 500 प्रदर्शनकारी घायल होने चाहिए थे, हालांकि मैं कभी नहीं चाहता कि किसी की जान जाए।भाजपा ने प्रदर्शनकारियों और बेदखल लोगों की नागरिकता की स्थिति के बारे में भी संदेह जताया और संकेत दिया कि राज्य के लिए अद्यतन राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी), जिसे अभी अधिसूचित किया जाना है, की समीक्षा की जा सकती है। 

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