चीन से लगवाए बिजलीघर, अब कर्ज पर गिड़गिड़ा रहा पाकिस्तान, चिनफिंग से की यह अपील

पाकिस्तान तीन अरब डॉलर के कर्ज की वापसी के लिए समय बढ़ाने को चीन से गिड़गिड़ा रहा है।

कर्जों के बोझ तले दबा पाकिस्तान तीन अरब डॉलर (करीब 22 हजार करोड़ भारतीय रुपये) के कर्ज की वापसी के लिए समय बढ़ाने को चीन से गिड़गिड़ा रहा है। यह कर्ज सीपीईसी के अंतर्गत आने वाली बिजली परियोजना से संबंधित है।

Krishna Bihari SinghSat, 01 May 2021 08:25 PM (IST)

इस्लामाबाद, एएनआइ। कर्जों के बोझ तले दबा पाकिस्तान तीन अरब डॉलर (करीब 22 हजार करोड़ भारतीय रुपये) के कर्ज की वापसी के लिए समय बढ़ाने को चीन से गिड़गिड़ा रहा है। यह कर्ज चीन-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के अंतर्गत आने वाली बिजली परियोजना से संबंधित है। पाकिस्तान चाहता है कि उसे कर्ज चुकाने के लिए 10-12 साल का समय मिल जाए।

इमरान खान सरकार महंगाई और अन्य समस्याओं के चलते इस समय विपक्ष के निशाने पर है। वह नहीं चाहती की बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी कर वह विपक्ष को हमले का एक मुद्दा और दे दे। इसलिए वह चीन से कर्ज चुकाने के समय में बढ़ोतरी की मांग कर रही है। यह जानकारी पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने दी है।

प्रधानमंत्री के ऊर्जा मामलों के विशेष सहायक ताबिश गौहर ने बताया है कि पाकिस्तान को चीन की 12 निजी कंपनियों को तीन साल के भीतर तीन अरब डॉलर का भुगतान करना है। इन कंपनियों ने पाकिस्तान की बिजली परियोजनाओं में निवेश कर रखा है।

पाकिस्तान सरकार ने इस कर्ज को 10 से 12 साल में वापस करने का अनुरोध चीन सरकार से किया है। इससे पाकिस्तान सरकार को बिजली मूल्य में एक साथ 1.50 पाकिस्तानी रुपये प्रति यूनिट की बढ़ोतरी करने की आवश्यकता से छूट मिल जाएगी। इसकी जगह वह बिजली मूल्य में कम बढ़ोतरी करेगी और कर्ज को धीरे-धीरे चुकता करेगी।

उल्लेखनीय है कि चीनी कंपनियों ने सीपीईसी के अंतर्गत दो दर्जन विद्युत संयंत्र पाकिस्तान में लगाए हैं और समझौते के अनुसार उनमें लगे धन की वापसी जनता से वसूले जाने वाले बिजली मूल्य से होनी है। इसीलिए पाकिस्तान सरकार पर बिजली मूल्य में भारी बढ़ोतरी का दबाव है।

प्रधानमंत्री के विशेष सहायक ने कहा, हम अपने मित्र देश को किसी तरह की मुश्किल में नहीं डालना चाहते लेकिन असलियत यह है कि चीनी कंपनियों को भुगतान होने वाली किस्तों की आधी धनराशि तो चीन की अन्य परियोजनाओं से ही वसूली की जानी है। क्योंकि इन विद्युत संयंत्रों की बिजली का उन्हीं परियोजनाओं में इस्तेमाल हो रहा है।

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