पाक के विवादित मंत्री शेख राशिद ने कहा, अफगानिस्तान को 17 दिनों में स्कैंडिनेवियाई देश बनाना संभव नहीं

पाकिस्तान के विवादित मंत्री शेख राशिद ने कहा है कि इतने कम समय में अफगानिस्तान के स्कैंडिनेवियाई देश बनने की उम्मीद करना संभव नहीं है क्योंकि काबुल अपनी गति से आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश में शांति चाहता है जहां अब तालिबान का शासन है।

Arun Kumar SinghSat, 18 Sep 2021 06:25 PM (IST)
पाकिस्तान के विवादित मंत्री शेख राशिद ने कहा है

 इस्‍लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान के विवादित मंत्री शेख राशिद ने कहा है कि इतने कम समय में अफगानिस्तान के 'स्कैंडिनेवियाई देश' बनने की उम्मीद करना संभव नहीं है क्योंकि काबुल अपनी गति से आगे बढ़ रहा है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार ने बताया कि यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए शेख राशिद ने कहा कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी देश में शांति चाहता है, जहां अब तालिबान का शासन है। उन्होंने कहा कि तालिबान के अंतरिम अफगान सरकार के गठन के केवल 17 दिन बीत चुके हैं। द न्यूज इंटरनेशनल ने उन्होंने उद्धृत करते हुए शेख राशिद ने कहा कि यह संभव नहीं है कि अफगानिस्तान इतने कम समय में स्कैंडिनेवियाई देश बन जाए। अगर कोई चाहता है कि अफगानिस्तान एक स्कैंडिनेवियाई देश में बदल जाए तो वे दोषी हैं क्योंकि काबुल अपनी गति से आगे बढ़ रहा है।

जानें कौन हैं स्कैंडिनेवियाई देश

नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क तीन स्कैंडिनेवियाई देश हैं। तीनों देश अपने उच्च स्तर की समानता, कम बेरोजगारी और आधुनिक सामाजिक सेवा प्रणालियों के लिए जाने जाते हैं। मानवीय मुद्दों के बारे में शेख राशिद ने कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया है क्योंकि वह नहीं चाहता कि युद्ध से तबाह देश में कोई भूख से मरे।

कई बार दे चुके हैं बयान

यह पहली बार नहीं है, जब आंतरिक मंत्री राशिद ने अफगानिस्तान की तुलना स्कैंडिनेवियाई देशों से की है। पिछले हफ्ते, उन्होंने कहा था कि दुनिया के लिए यह उम्मीद करना अनुचित होगा कि अफगानिस्तान आठ दिनों में कुछ स्कैंडिनेवियाई देशों की तरह समृद्ध हो जाएगा और आगाह किया कि अफगान खातों को फ्रीज करने से मानवीय संकट पैदा हो सकता है।

दो दशक के सबसे महंगे युद्ध के बाद 31 अगस्त को अमेरिका की पूरी सेना वापस चली गई थी। इससे दो हफ्ते पहले तालिबान ने 15 अगस्त को अफगानिस्तान में सत्ता पर कब्जा कर लिया था। तालिबान ने अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी को देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात जाने के लिए मजबूर किया था।

इससे पहले तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान में धावा बोल दिया था और कुछ ही दिनों में सभी प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया था क्योंकि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा प्रशिक्षित और सुसज्जित अफगान सेना ने तालिबान से मुकाबला ही नहीं किया। नए तालिबान शासन से बचने के लिए अमेरिका और कई यूरोपीय देशों में शरण लेने के लिए हजारों अफगान नागरिक और विदेशी देश छोड़कर भाग गए हैं क्‍योंकि देश पर कब्‍जा करने के बाद अराजकता की स्‍थिति पैदा हो गई थी।

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