बाइडन को लेकर इमरान खान का छलका दर्द, कहा- राष्ट्रपति बनने के बाद नहीं किया एक फोन

इमरान ने इंटरव्यू में एक सवाल पर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का युद्ध पाकिस्तान के लिए विनाशकारी था। अफगानिस्तान में 20 वर्ष चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने किराए की बंदूक की तरह पाकिस्तान का इस्तेमाल किया था।

Dhyanendra Singh ChauhanThu, 16 Sep 2021 08:54 PM (IST)
अमेरिका ने 'किराए की बंदूक' की तरह इस्तेमाल किया: इमरान खान

इस्लामाबाद, एजेंसियां। बाइडन के राष्ट्रपति बनते ही पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों पर तनातनी चल रही है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सीएनएऩ को एक इंटरव्यू दिया है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन द्वारा पाक की अनदेखी किए जाने पर इमरान खान का दर्द छलक पड़ा। इमरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के फोन नहीं करने के सवाल पर कहा 'वह बेहद व्यस्त इंसान हैं। वह इतने व्यस्त हैं कि फोन नहीं कर पाते।' जो बाइडन गत जनवरी में अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से दुनिया के कई नेताओं से फोन पर बातचीत कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इमरान को फोन नहीं किया है।

अमेरिका ने 'किराए की बंदूक' की तरह इस्तेमाल किया

समाचार एजेंसी एएनआइ के अनुसार, इमरान ने इंटरव्यू में एक सवाल पर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का युद्ध पाकिस्तान के लिए विनाशकारी था। अफगानिस्तान में 20 वर्ष चले युद्ध के दौरान अमेरिका ने 'किराए की बंदूक' की तरह पाकिस्तान का इस्तेमाल किया था।

तालिबान सरकार के समर्थन में खुलकर उतरे पाक पीएम

वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को मान्यता दिलाने के समर्थन में खुलकर उतर आए हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस नई सरकार के साथ संपर्क बनाना चाहिए। इसके साथ बात करनी चाहिए। इमरान ने बुधवार को सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा, 'अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता की दिशा में तालिबान के साथ बातचीत सबसे अच्छा तरीका है। इस तरीके से उनको महिला अधिकारों और समावेशी सरकार जैसे मसलों पर प्रोत्साहित किया जा सकता है।'  उन्होंने यह भी कहा कि विश्व समुदाय को तालिबान को वक्त देना चाहिए, जिससे वे विधि संगत सरकार बनाने के साथ अपने वादों की दिशा में प्रगति साबित कर सकें।

बता दें कि तालिबान ने तकरीबन पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद गत 15 अगस्त को राजधानी काबुल पर भी कब्जा कर लिया था। इसके बाद इस महीने की शुरुआत में अंतरिम सरकार का एलान किया गया, लेकिन जिन लोगों को सरकार में शामिल किया गया है, उनमें से 14 तालिबान सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से आतंकी घोषित हैं। तालिबान ने समावेशी सरकार बनाने का वादा किया था, लेकिन कैबिनेट में एक भी महिला को जगह नहीं दी गई है।

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