इमरान खान ने माना, पाकिस्तान में नहीं है कानून का राज, संसाधनों पर खास लोगों ने कर लिया है कब्जा

प्रधानमंत्री इमरान खान ने माना है कि संसाधनों पर खास लोगों के कब्जा करने और देश में कानून का राज न होना पाकिस्तान के पिछड़ेपन के मुख्य कारण हैं। इमरान ने यह बात अमेरिका के मुस्लिम विद्वान शेख हमजा यूसुफ से आनलाइन इंटरव्यू में कही है।

TaniskMon, 29 Nov 2021 12:21 AM (IST)
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान। (फाइल फोटो)

इस्लामाबाद, प्रेट्र। प्रधानमंत्री इमरान खान ने माना है कि संसाधनों पर खास लोगों के कब्जा करने और देश में कानून का राज न होना पाकिस्तान के पिछड़ेपन के मुख्य कारण हैं। इमरान ने यह बात अमेरिका के मुस्लिम विद्वान शेख हमजा यूसुफ से आनलाइन इंटरव्यू में कही है। शेख कैलीफोर्निया के जेतुना कालेज के प्रमुख भी हैं। इमरान इससे पहले पाकिस्तान में हजारों आतंकियों के सक्रिय होने की बात भी स्वीकार कर चुके हैं।

इमरान ने कहा, कुछ खास लोगों के संसाधनों पर कब्जा कर लेने से बहुसंख्यक जनता स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय की सुविधा से वंचित है। कानून का राज न होने से देश उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया जहां उसे होना चाहिए था। उन्होंने कहा, कोई भी समाज तब तक तरक्की नहीं कर सकता जब तक वह नियमों के अनुसार न चले। ज्यादातर विकासशील देशों में यही समस्या है। पाकिस्तान में भी गरीबों के लिए अलग कानून है और अमीरों के लिए अलग।

अपराध करने वाले की गुणवत्ता के आधार पर कानून काम करता है। अगर आप अमीर हैं तो प्रमुख स्थान पर बैठेंगे और अगर गरीब हैं तो जीवन भर संघर्ष ही करते रहेंगे। प्रधानमंत्री का यह इंटरव्यू पाकिस्तान टेलीविजन पर रविवार को प्रसारित हुआ। इमरान ने कहा, पाकिस्तान को वह कल्याणकारी इस्लामी राष्ट्र बनाना चाहते हैं जैसी कल्पना मदीना को लेकर पैगंबर मुहम्मद ने की थी। उनकी सरकार दो सिद्धांतों पर चलकर देश को आगे ले जाना चाहती है। इनमें से एक सिद्धांत पाकिस्तान को कल्याणकारी राष्ट्र बनाने का है और दूसरा कानून का राज स्थापित करने का है।

पर्यावरण के मसले पर इमरान ने कहा, इसमें सुधार के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाने चाहिए। क्योंकि धरती पर जीवन बचाने के लिए यह जरूरी है। अगर इस कार्य में ईमानदारी न बरती गई तो भविष्य में आपदाएं आएंगी और तब कोई कुछ नहीं कर पाएगा। मनुष्य वर्तमान में जो करेगा, वह आने वाली पीढ़ियों के हिस्से में आएगा। इमरान ने कहा, ज्यादातर मुस्लिम देशों के शासक अपना भरोसा खो चुके हैं। वे समझौते करके सत्ता में आते हैं और फिर उसमें बने रहने के लिए समझौते करते हैं और अपने निजी फायदों के लिए काम करते हैं। इससे वे जनता के हितों से कट जाते हैं।

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