अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद लश्कर-ए-तैयबा की मदद कर रहा पाकिस्तान, जारी है आतंकियों का प्रशिक्षण

आतंक का आका पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को न सिर्फ संरक्षण दे रहा है बल्कि खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान में नए ठिकानों की स्थापना व आतंकियों की भर्ती में मदद भी कर रहा है।

Arun Kumar SinghPublish:Tue, 23 Nov 2021 07:40 PM (IST) Updated:Tue, 23 Nov 2021 07:40 PM (IST)
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद लश्कर-ए-तैयबा की मदद कर रहा पाकिस्तान, जारी है आतंकियों का प्रशिक्षण
अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद लश्कर-ए-तैयबा की मदद कर रहा पाकिस्तान, जारी है आतंकियों का प्रशिक्षण

नई दिल्ली, एएनआइ। आतंक का आका पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को न सिर्फ संरक्षण दे रहा है, बल्कि खैबर पख्तूनख्वा और अफगानिस्तान में नए ठिकानों की स्थापना व आतंकियों की भर्ती में मदद भी कर रहा है। पाकिस्तान के शह पर इन ठिकानों में आतंकियों का प्रशिक्षण बेरोकटोक जारी है। डेली सिख की रिपोर्ट के अनुसार, भले ही पाकिस्तान इस आतंकी संगठन व उसके गुर्गो पर कार्रवाई का दावा करता रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि इसमें भर्तियां कई गुना ज्यादा हो गई हैं।

आतंकी संगठन ने खैबर पख्तूनख्वा व अफगानिस्तान में बनाए नए ठिकाने, भर्ती व प्रशिक्षण जारी

यही नहीं, लश्कर-ए-तैयबा, हक्कानी नेटवर्क और इस्लामिक स्टेट-खुरासान (आइएस-के) जैसे आतंकी संगठनों के साथ साझेदारी के जरिये अपना आधार मजबूत कर रहा है। पाकिस्तान लश्कर के नेतृत्व का इस्तेमाल अफगानिस्तान में तालिबान को मजबूत करने के लिए कर रहा है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे में लश्कर-ए-तैयबा की भूमिका अहम रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लश्कर और तालिबान दोनों को पाकिस्तान का संरक्षण प्राप्त रहा है। इसके कारण आतंकी संगठन को अफगानिस्तान में जड़ें मजबूत करने में आसानी हो रही है।

पाकिस्तानी सेना की भी मदद करते हैं लश्कर के आतंकी

मई 2018 में संयुक्त राष्ट्र के निगरानी समूह ने कहा था कि लश्कर पाकिस्तान के मदरसों के जरिये भर्तियां कर रहा है, जिन्हें अफगानिस्तान के कुनार व नंगरहार प्रांत में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लश्कर-ए-तैयबा वर्ष 2008 के मुंबई हमले में शामिल रहा है। इसके कारण पाकिस्तान पर इस आतंकी संगठन को प्रतिबंधित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव रहा है। इसके विपरीत, लश्कर के आतंकी पाकिस्तानी सेना की भी मदद करते हैं। सामरिक पर्यवेक्षक अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे को अमेरिका की आतंकरोधी रणनीति की विफलता बताते हैं।