महिलाओं की आवाज दबा रहा पाकिस्तान, 26 लाख से ज्यादा राजनीतिक अधिकार से वंचित

इस्लामाबाद, एएनआइ। भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाने वाला पाकिस्तान बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के लोगों पर जुल्म ढ़ाता आ रहा है। पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन से पूरी दुनियां वाकिफ है। पाकिस्तान यहां के लोगों को उनकी मूलभूत अधिकारों से भी वंचित रख रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा (Phyber Pakhtunkhwa) में रहने वाली लगभग 26 लाख महिलाओं के पास राष्ट्रीय पहचान पत्र (National Identity Card) नहीं है।

ट्रस्ट फॉर डेमोक्रेटिक एजुकेशन एंड अकाउंटेबिलिटी (TDEA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 लाख महिलाओं में से 10 लाख स्वाबी से है, जबकि 7 लाख एबटाबाद और 9 लाख बाजौर से हैं, जिनके पास राष्ट्रीय पहचान पत्र नहीं है। इसकी वजह से इन महिलाओं को न तो वोट देने का अधिकार है न ही ये देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति में कोई भूमिका निभी पा रही हैं।

26 लाख महिलाओं के पास पहचान पत्र नहीं
टीडीइए (TDEA) के एक ट्वीट के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा में 26 लाख महिलाओं के पास राष्ट्रीय पहचान पत्र नहीं है। इसके कारण राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रगति में भूमिका निभाने की उनकी क्षमता प्रतिबंधित है। इसके साथ ही वह सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाने में भी असमर्थ हैं।

बता दें की पहचान पत्र से पाकिस्तान में नागरिकों को मतदान करने और राजनीतिक दलों की सदस्यता लेने का हक मिलता है। पहचान पत्र से ही उनको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। पहचान पत्र न होना इन महिलाओं को देश का पूर्ण नागरिक बनने से वंचित करता है।

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