ये है पाकिस्तान की हकीकत, अल्पसंख्यकों का जीना दुश्वार; हिंदू लड़की की हॉस्टल में गला घोंटकर हत्या

कराची,एजेंसी। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा सलूक होता है उसकी एक और ताजा तस्वीर सामने आई है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोतकी इलाके की एक हिंदू लड़की लरकाना के असीफा मेडिकल डेंटल कॉलेज के हॉस्टल में सोमवार को मृत पाई गई। माना जा रहा है कि लड़की की रस्सी से गला घोंटकर हत्या हुई है। कॉलेज प्रशासन इससे इनकार कर रहा है और इसे आत्महत्या बता रहा है। 

यह मामला घोतकी में कट्टरपंथियों द्वारा एक मंदिर में जमकर तोड़फोड़ के बाद सामने आई है। यह विवाद हाईस्कूल के एक हिंदू शिक्षक पर ईश निंदा के झूठे आरोपों से शुरू हुआ। इसे लेकर कट्टरपंथियों ने स्कूल और मंदिर पर हमला बोल दिया और जमकर तोड़फोड़ की।

मामले को रफा दफा करने की कोशिश
जानकारी अनुसार बीडीएस की अंतिम वर्ष की छात्रा नमृता चंदानी सोमवार को अपने कमरे में मृत पाई गई। उसका शव गले में रस्सी से बंधा बिस्तर पर पड़ा था। कॉलेज प्रशासन इसे आत्महत्या बताने की कोशिश कर रही है, लेकिन सबूत दूसरी दिशा में इशारा कर रहे हैं।

जान बचाने के लिए काफी संघर्ष किया
घटनास्थल से ऐसे सबूत मिले जिससे लगता है कि उसने अपनी जान बचाने के लिए काफी संघर्ष किया। यही नहीं उसका फोन भी गायब हो गया था जिसे बाद में पुलिस ने बरामद कर लिया। अब सवाल यह उठ रहे हैं कि अगर लड़की ने आत्महत्या की है तो उसका शव रस्सी से लटकने के बजाय बिस्तर पर क्यों पड़ा था, जैसा कि आमतौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या के मामलों में होता है।

मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
इस घटना से संबंधित एक वीडियो समाने आया है, जिसमें नमृता का भाई डॉ. विशाल को यह कहते हुए देखा गया कि उसके गले पर रस्सी के निशान थे। उसने कहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और नागरिकों को उनके परिवार का समर्थन करना चाहिए।

लगातार अल्पसंख्यकों पर हो रहा अत्याचार
पिछले कुछ हफ्तों में, पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और बलपूर्वक धर्मांतरण कराने का कई मामले सामने आए हैं। इस महीने की शुरुआत में, एक सिख लड़की का अपहरण कर लिया गया और उसे एक मुस्लिम व्यक्ति से शादी करने के लिए मजबूर किया गया। फिर उसे उसके माता-पिता के पास वापस भेज दिया गया। इसी तरह, एक 15 वर्षीय ईसाई छात्र को जबरन इस्लाम में धर्मांतरण कराया गया था और बीबीए की एक हिंदू छात्रा को एक पीटीआई कार्यकर्ता के घर ले जाया गया और एक मुस्लिम से शादी करने के लिए मजबूर किया गया। बता दें कि पाकिस्तान में बलपूर्वक धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने वाला कोई कानून नहीं है।

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