FATF के फैसले से बेचैन हुआ Pak, उठे सवाल-आखिर कौन हैं सईद और अजहर, क्‍या है भारत से लिंक

हाफ‍िज सईद और मसूद अजहर को संरक्षण देना पाकिस्तान को एक बार फिर से महंगा पड़ा है। आखिर कौन है हाफिज सईद और मसूद अजहर ? क्‍या है इनके संगठनों का नाम ? भारत में कई आतंकी घटनाओं के लिए हैं जिम्‍मेदार ?

Ramesh MishraFri, 22 Oct 2021 04:50 PM (IST)
FATF के फैसले के बाद बेचैन हुआ Pak, उठे सवाल-आखिर कौन हैं सईद और अजहर।

नई दिल्ली, आन लाइन डेस्क। पाकिस्तान को एक बार फिर आतंकवादी संगठनों की मदद करना काफी भारी पड़ा है। खासकर पाकिस्‍तान में रह रहे हाफ‍िज सईद और मसूद अजहर को संरक्षण देना उसे महंगा पड़ा है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) ने पाकिस्तान को और सुधार करने की चेतावनी देते हुए एक बार फ‍िर उसको ग्रे लिस्ट में डाला है। आखिर कौन है हाफिज सईद और मसूद अजहर ? क्‍या है इनके संगठनों का नाम ? भारत में कई आतंकी घटनाओं के लिए हैं जिम्‍मेदार ? इन दोनों खूंखार आतंकवादियों का भारत से क्‍या लिंक है ? पाकिस्‍तान का ग्रे लिस्‍ट में शामिल होना क्‍या भारत की कूटनीतिक जीत है ?

आखिर कौन है हाफ‍िज सईद, क्‍या है भारत से लिंक

आतंकी संगठन लश्‍कर ए तैयबा का संस्‍थापक हाफ‍िज सईद 26/11 में मुंबई बम हमले का मास्‍टरमाइंड है। वह इस धमाके का प्रमुख साजिशकर्ता है। इस हमले में छह अमेरिकियों समेत 164 लोगों की मौत हो गई थी। वर्ष 2006 में मुंबई ट्रेन धमाकों में भी सईद का हाथ रहा है। वर्ष 2001 में भारतीय संसद के हमले में भी उसका हाथ रहा है। वह एनआइए की मोस्‍ट वांटेड सूची में शामिल है। मुंबई हमले के बाद भारत ने सईद को पाकिस्‍तान से सौंपने को कहना था, लेकिन पाक सईद को आतंकवादी मानने से इनकार करता रहा है। भारत समेत अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस और आस्‍ट्रेलिया ने सईद के संगठनों पर प्रतिबंध लगा रखा है। 2012 में अमेरिका ने उस पर 10 मिनियन डालर यानी करीब 70 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा है। भारत के आग्रह पर इंटरपोल ने सईद के खिलाफ वर्ष 2009 में रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था। रेड कार्नर नोटिस के बावजूद वह पाकिस्‍तान में खुलेआम घूमता दिखाई देता था। उसे पाकिस्‍तानी सरकार का संरक्षण प्राप्‍त है। हालांकि, अतंरराष्‍ट्रीय दबाव के आगे पाकिस्‍तान ने वर्ष 2017 में जमात उद दावा के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इसके बाद वह पाक में नजरबंद कर दिया गया। बाद में उसे र‍िहा कर दिया गया। इसके बाद जुलाई 2018 में पाकिस्‍तान को एफएटीएफ की ग्रे लिस्‍ट में डाल दिया गया था। पाकिस्‍तान पर पहली बार कार्रवाई करते हुए ग्रे लिस्‍ट में डाला गया था। पाकिस्‍तान अतंरराष्‍ट्रीय दबाव के आगे फ‍िर झुका और 17 जुलाई, 2019 को काउंटर टेररिज्‍म डिपार्टमेंट द्वारा उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ 23 एफआइआर दर्ज की गई। उस पर आतंकवाद के वित्‍त पोषण, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध भूमि हथियाने से संबंध‍ित 29 मामले दर्ज हैं। इस समय वह पाकिस्‍तान की एक जेल में बंद है। हाफ‍िज सईद आतंकी संगठन लश्‍कर ए तैयबा का संस्‍थापक है। अंतरराष्‍ट्रीय दबाव के चलते उसने अपने संगठन का नाम बदल कर जमात उद दावा कर लिया। सईद का जन्‍म 5 जून, 1950 को पाकिस्‍तान के सरगोधा पंजाब में हुआ था। वह 70 साल का है। भारत-पाकिस्‍तान बंटवारे के समय उसका परिवार हरियाणा के हिसार से लाहौर चला गया था। सईद मूलरूप से इंजीनियर है। वह अरबी भाषा का प्रोफेसर रह चुका है। अमेरिकी सरकार की वेबसाइट रिवार्ड्स फार द जस्टिस में सईद को जमात उद दावा, अहले हदीद और लश्‍कर ए तैयबा का संस्‍थापक बताया गया है। अहले हदीद एक ऐसा इस्‍लामिक संगठन है, जिसकी स्‍थापना भारत में इस्‍लामिक शासन लागू करने के लिए की गई है।

कौन है आतंकी अजहर, क्‍या है भारत से लिंक

मौलाना मसूद अजहर आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है। जैश-ए-मोहम्मद संगठन ने भारत के पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें भारत के 40 से ज्यादा जवान शहीद हो गए थे। बाद में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक कर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी कैंप को नष्ट करने का दावा किया था। मसूद अजहर पर ही पठानकोट में आतंकी हमले कराने का आरोप लगा था। अजहर को 1999 में कंधार विमान अपहरण मामले में भारत ने रिहा किया था। 24 दिसंबर 1999 को आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज का अपहरण कर लिया था। आतंकियों ने भारत सरकार के सामने 178 यात्रियों की जान के बदले में अपने तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया था। उन तीन आतंकवादियों में से एक मसूद अजहर भी था। उस वक्त अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था। रिहाई के बाद पाकिस्तान के कराची में 31 जनवरी 2000 को मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन की शुरुआत के साथ जेहाद की दुनिया में फिर कदम रखा। अजहर का जन्म पाकिस्तान के बहावलपुर में 1968 को हुआ था। ग्यारह भाई-बहनों में अजहर 10वें नंबर पर है। अजहर के पिता सरकारी स्कूल में हेडमास्टर थे। उसका परिवार डेयरी का करोबार भी करता था। अजहर की शिक्षा कराची में जामिया उलूम अल इस्लामिया में हुई। बाद में अजहर हरकत-उल अंसार संगठन से जुड़ गया। पहली बार वह 1994 में आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया। 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद अजहर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन लाहौर उच्‍च न्‍यायल के आदेश पर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया। 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या और उसके अपहरण के बाद अमेरिका ने अजहर को सौंपने की मांग की थी। 2003 में परवेज मुशर्रफ पर हुए आत्मघाती हमले के मामले में भी उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। दिसंबर 2008 में भारत और अमेरिका के दबाव के कारण पाक सरकार ने मसूद को उसके आवास पर नजरबंद कर दिया था। इससे पहले भी दो बार अजहर को हिरासत में लिया गया था। हालांकि, हर बार वह बचने में कामयाब रहा।

ग्रे लिस्‍ट और पाकिस्‍तान

भारत यह कहता रहा है कि पाकिस्‍तान आतंकवादी समूहों की मदद करता रहा है। वर्ष 2008 में दुनिया के सामने पाकिस्‍तान पहली बार तब बेनकाब हुआ, जब वह ग्रे लिस्‍ट में शामिल हुआ। हालांकि, वर्ष 2009 में वह इस लिस्‍ट से बाहर आ गया, लेकिन उसने आतंकवादियों को मदद करना जारी रखा। इसके चलते एफएटीएफ ने उसे दोबारा 2012 में ग्रे लिस्‍ट में शामिल किया। एफएटीएफ की आंखों में धूल झोंक कर वह फ‍िर 2016 में बाहर निकल गया। दो वर्ष बाद 2018 में एक बार फ‍िर वह ग्रे लिस्‍ट में शामिल हुआ और उसके बाद से वह इस लिस्‍ट से निकलने को बेताब है। वह लगातार आतंकी संगठनों को आर्थिक मदद मुहैया करा रहा है।

आखिर क्या है ग्रे लिस्ट

इस लिस्ट में शामिल देशों को सबसे बड़ी दिक्‍कत कर्ज लेने में आती है। ग्रे लिस्‍ट में शाम‍िल देशों को किसी भी अंतरराष्ट्रीय मॉनेटरी बॉडी या किसी देश से कर्ज लेने के पहले बेहद सख्त शर्तों को पूरा करना पड़ता है। ग्रे लिस्‍ट में शामिल देशों को ज्यादातर संस्थाएं कर्ज देने में आनाकानी करती हैं। उक्‍त देशों का अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार भी प्रभावित होता है। एफटीएएफ के ग्रे लिस्ट में उन देशों को रखा जाता है, जिन पर आतंकियों को वित्‍तीय मदद और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने या इनकी अनदेखी का शक होता है। ग्रे लिस्‍ट में शामिल देशों को कार्रवाई करने की सशर्त मोहलत दी जाती है। एफएटीएफ इसकी मॉनिटरिंग करती है। अगर इन देशों में सुधार सामने आता है तो उनको इस लिस्‍ट से बाहर कर दिया जाता है।

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