वैक्सीन वितरण पर बोले WHO प्रमुख, अमीर और गरीब देशों के लिए चौंकाने वाला असंतुलन

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि वैश्विक वितरण में एक चौंकाने वाला असंतुलन बना हुआ है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा कि 220 देशों और अर्थव्यवस्थाओं में से 194 में अब टीकाकरण शुरू हो गया है जबकि अभी 26 देश ऐसे हैं जहां टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है। टीकों के वैश्विक वितरण में एक चौंकाने वाला असंतुलन बना हुआ है।

Manish PandeySun, 11 Apr 2021 08:08 AM (IST)

जिनेवा, एएनआइ। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेबियस ने कहा है कि गरीब देशों के लिए कोविड-19 टीकों के वितरण में 'चौंकाने वाला असंतुलन' है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने शुक्रवार को एक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि 220 देशों और अर्थव्यवस्थाओं में से 194 में अब टीकाकरण शुरू हो गया है, जबकि अभी 26 देश ऐसे हैं जहां टीकाकरण शुरू नहीं हुआ है। इन 26 देशों में से 7 को वैक्सीन मिल चुकी है और वह जल्द ही टीकाकरण शुरू कर देंगे और आने वाले दिनों में 5 और देशों को कोरोना की वैक्सीन मल जाएगी।

टेड्रोस ने कहा कि कई कारणों से अभी भी 14 देशों में टीकाकरण शुरू नहं हुआ है। कुछ देशों ने COVAX के माध्यम से टीके का अनुरोध नहीं किया है, कुछ टीकाकरण के लिए अभी तक तैयार नहीं हैं और कुछ आने वाले हफ्तों और महीनों में टीकाकरण शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि COVAX ने पिछले छह सप्ताह में 100 से अधिक देशों और अर्थव्यवस्थाओं को वैक्सीन की 38 मिलियन (3.8 करोड़) से अधिक खुराक वितरित की है। अधिकांश देशों में सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या सभी जोखिम वाले समूहों को कवर करने के लिए पर्याप्त टीके नहीं हैं। टीकों के वैश्विक वितरण में एक चौंकाने वाला असंतुलन बना हुआ है।

टेड्रोस ने कहा कि अमीर देशों में औसतन, चार में से लगभग एक व्यक्ति को एक टीका प्राप्त हुआ है, जबकि गरीब देशों में यह आंकड़ा 500 से एक है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा मार्च के अंत तक लगभग 100 मिलियन (10 करोड़) खुराक वितरित करने का लक्ष्य था, लेकिन आपूर्ति में उल्लेखनीय कमी के कारण हम केवल 38 मिलियन (3.8 करोड़) खुराक ही वितरित कर पाए हैं। हमें उम्मीद है कि अप्रैल और मई के इसमें रफ्तार आएगी।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन ने हाल ही में अमीर देशों से गरीब देशों को अधिक वैक्सीन की खुराक दान करने का आह्वान करते हुए कहा था कि गरीब राष्ट्र बिना किसी मदद के 'गहन आर्थिक त्रासदी' का सामना करना पड़ सकता है।

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