संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कहा, अफगानिस्तान में महिलाओं की हो समान भागीदारी

प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि अफगानिस्तान में एक समावेशी और सभी का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार का गठन किया जाना चाहिए। सरकार को मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। विशेषतौर पर इस मामले में महिलाओं बच्चों और अल्पसंख्यकों का विशेष ध्यान रखा जाए।

Dhyanendra Singh ChauhanSat, 18 Sep 2021 07:50 PM (IST)
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया

काबुल, एएनआइ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने एक प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए अफगानिस्तान में एक समावेशी सरकार का गठन और उसमें महिलाओं की समान और सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया।

प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि अफगानिस्तान में एक समावेशी और सभी का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार का गठन किया जाना चाहिए। सरकार को मानवाधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। विशेषतौर पर इस मामले में महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों का विशेष ध्यान रखा जाए।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने निर्णय लिया है कि मानवीय सहायता की हर दो माह बाद समीक्षा की जाएगी। सदस्यों का मानना है कि अफगानिस्तान में यूएन एजेंसियों के निरंतर काम करने की आवश्यकता है। अफगानिस्तान की महिलाएं वहां के समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उन्हें प्रमुखता दिए जाने की आवश्यकता है।

परिषद के सभी सदस्य यह भी सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अफगानिस्तान की धरती का आतंकवाद के लिए इस्तेमाल न किया जाए।

वहीं, पूर्व में कतर के विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान अल थानी ने कहा था कि उन्होंने तालिबान से आग्रह किया है कि वह महिलाओं का सम्मान करें। कतर के विदेश मंत्री ने यह भी कहा था कि तालिबान की सरकार को मान्यता देने पर विचार करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया था कि हमने हमेशा तालिबान से कहा कि वह अफगानिस्तान में विकास के लिए अफगान लोगों और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा करे।

गौरतलब है कि अमेरिकी सैनिकों के हटने और अफगान सरकार के पतन के बाद तालिबान ने पिछले महीने अफगानिस्तान पर पूर्ण नियंत्रण हासिल कर लिया था। जिसके बाद से अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति बदतर हो गई है। इसके साथ ही स्कूल और कालेज में लड़कियों को पढ़ने पर भी भी तालिबान कई तरह की आपत्ति जता रहा है।

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