हैरात प्रांत में संयुक्‍त राष्‍ट्र परिसर पर हमला करने वालों को मिलनी चाहिए सजा- UNAMA

यूएन मिशन के परिसर में हुए हमले की हर तरफ कड़ी निंदा हो रही है। यूएन की विशेष प्रतिनिधि डेबराह लियोंस ने कहा है कि इसके दोषियों को सजा होनी चाहिए और इसकी जांच की जानी भी जरूरी है।

Kamal VermaSun, 01 Aug 2021 04:05 PM (IST)
यूएन के परिसर पर हुए हमले की हो रही निंदा

काबुल (आईएएनएस)। यूएन असिसटेंस मिशन इन अफगानिस्‍तान (यूएनएएमए) ने तालिबान से हैरात प्रांत में अपने मुख्‍य परिसर पर हुए हमले पर जवाब मांगा है और साथ ही इस हमले की जांच कराने की भी मांग की है। इस हमले में एक अफगान पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी जबकि कुछ अन्‍य घायल हो गए थे। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है। यूएनएएमए का कहनाकहै कि 30 जुलाई को उनके परिसर पर रॉकेट हमला किया गया और अंधाधुंध फायरिंग भी की गई थी। ये सब उस समय हुआ जब अफगान सेना ने तालिबान के आतंकियों को हैरात प्रांत में मार गिराया था।

यूएनएएमए ने इस संबंध में किए गए एक ट्वीट में कहा है कि तालिबानियों ने उनके परिसर में तैनात गार्ड की हत्‍या कर दी। इसके लिए उसको जिम्‍मेदारी लेनी होगी। गौरतलब है कि हैरात प्रांत में 28 जुलाई से ही अफगान और तालिबान आतंकियों के बीच जबरदस्‍त लड़ाई चल रही है। तालिबान इसपर कब्‍जे के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। लगातार चार दिनों से जारी इस जंग में कई आम नागरिकों की भी मौत हो चुकी है। अफगानिस्‍तान के खराब हालातों पर और विशेषकर आम नागरिकों को राहत एजेंसियों पर हुए हमले को लेकर संयुक्‍त काफी चिंतित है।

अफगानिस्‍तान स्थित यूएन मिशन फिलहाल इस हमले के बारे में सुबूत और विवरण जमा कर रहा है। इसको लेकर वो संबंधित पक्षों के भी संपर्क में है। अफगानिस्‍तान में यूएन की विशेष प्रतिनिधि डेबराह लियोंस का कहना है कि इस हमले की जितनी निंदा की जाए कम ही है। उन्‍होंने इस हमले में मारे गए अफगानी गार्ड के परिवार के प्रति अपनी संवेदना भी व्‍यक्‍त की है। साथ ही हमले में घायल सभी लोगों के जल्‍द स्‍वस्‍थ होने की कामना की है।

आपको बता दें कि इस हमले में यूएन का कोई भी कर्मी घायल नहीं हुआ था। लियोंस ने इस बात भी जोर दिया है कि इस हमले के दोषियों की शिनाख्‍त की जानी चाहिए और इन्हें नियमानुसार सजा भी होनी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि अंतरराष्‍ट्रीय कानून के तहत यूएन कर्मचारियों और उसके परिसरों पर हमला पूरी तरह से वर्जित है। ऐसी घटनाओं को युद्धापराध की श्रेणी में रखा जा सकता है।

 

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