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अफगान सम्मेलन की मेजबानी करेगा तुर्की, भारत को भी किया गया आमंत्रित

इस्तांबुल में 10 दिनों के शांति सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

यह अचानक घोषणा तब की गई है जब तालिबान के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि धार्मिक मिलिशिया तुर्की में इस हफ्ते होने वाले शांति सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगी जिससे शांति योजना के लिए अमेरिकी प्रयास खटाई में पड़ता दिख रहा था।

Arun Kumar SinghWed, 14 Apr 2021 08:18 AM (IST)

अंकारा, एजेंसियां। तुर्की ने मंगलवार को घोषणा की कि इस महीने वह अफगानिस्तान के विभिन्न संघर्षरत पक्षों के बीच इस्तांबुल में 10 दिनों के शांति सम्मेलन की मेजबानी करेगा। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि सम्मेलन में तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा तुर्की, कतर और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी शामिल होंगे। इस सम्मेलन में भारत को भी आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन 24 अप्रैल से चार मई तक होगा। 

यह अचानक घोषणा तब की गई है जब तालिबान के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि धार्मिक मिलिशिया तुर्की में इस हफ्ते होने वाले शांति सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगी, जिससे शांति योजना के लिए अमेरिकी प्रयास खटाई में पड़ता दिख रहा था। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने सम्मेलन में भाग लेने वालों के बारे में विस्तृत सूचना नहीं दी। इसने कहा कि बैठक का उद्देश्य अंतर अफगान वार्ता में तेजी लाना है जो दोहा में चल रही है और उचित एवं स्थायी राजनीतिक समाधान तलाशना है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि सम्मेलन के सह आयोजक एक संप्रभु, स्वतंत्र और एकीकृत अफगानिस्तान का समर्थन करते हैं।

जो बाइडन ने कहा- अफगानिस्तान से सारे सैनिक बुला लेगा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि उन्होंने इस साल 11 सितंबर तक सभी अमेरिकी सैनिकों को युद्धग्रस्त अफगानिस्तान से वापस बुला लेने की योजना बनाई है। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी सेना 9/11 की 20वीं बरसी पर अफगानिस्तान छोड़ेगी।

ट्रंप प्रशासन ने एक मई निर्धारित की थी सैनिकों के वापस आने की तारीख

बताते चलें कि 2001 के 11 सितंबर को अमेरिका में ट्विन टावर पर हमला हुआ था। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने तालिबान से बातचीत के बाद अमेरिकी सैनिकों के वापस आने की तारीख एक मई निर्धारित की थी। बाइडन पिछले कई हफ्तों से इस बात के संकेत दे रहे थे कि वह समय सीमा खत्म होने देंगे और जैसे-जैसे दिन बीतते गए यह स्पष्ट होने लगा कि शेष 2,500 सैनिकों की वापसी मुश्किल होगी।

 

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