ऑस्ट्रेलिया में मिला कच्‍चा सोने का सबसे बड़ा टुकड़ा, कीमत जान कर रह जाएंगे दंग

मेलबर्न, [जागरण स्‍पेशल] आम तौर पर लोगों की आकांक्षा होती है कि उन्‍हें कहीं से गड़ा हुआ सोना मिल जाए। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ऐसा ही कुछ हुआ है। यहां एक खान को खोदने वाले ने इतिहास में सबसे बड़ा सोना नगेट (कच्‍चा सोना) का पता लगाया है। इस दौरान कई कच्‍चा सोने का टुकड़े जिसका वजन करीब 40 साइज है को सुरक्षित कर लिया गया है। इसकी कीमत करीब 10 मिलियन पाउंड (93.73 करोड़ रुपये) है।

मशीन से छेद करने वाले हेनरी डोले ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कंबल्डा के पास बीटा हंट खान में सोना नगेट के रूप में बड़ी खोज की है। उन्हें दो मिलियन पाउंड (18 करोड़ 76 लाख रुपया) का 14 साइज का सोना नगेट के रूप मिला, जिसमें से 10 कीमती धातु से बने होने का अनुमान है। खुदाई के दौरान कच्‍चे सोने के टुकड़े उठाने के लिए तीन पुरुष लाए गए।

कच्‍चा सोना देखकर धड़कने लगता है दिल 
इस देश में किसी भी अजनबी का सोने के नगेट को देखकर दिल धड़कता है। इससे पहले 12.3 साइज का अब तक का सबसे बड़ा खोजा गया पत्‍थर था। एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी खुदाई के दौरान एयरलेग और डोले फिर एक दूसरे नजदीक में आए, जिन्‍हें पहले 9.4 साइज मिला था और पत्‍थर के 1.5 मिलियन पाउंड (लगभग 14 करोड़ रुपये ) कीमत का होने का अनुमान लगाया गया।

पूरे करियर में ऐसा नहीं देखा 
16 साल से खान की खुदाई करने वाले का कहना है कि मैंने पूरे करियर में ऐसा नहीं देखा है। जैसे ही मैं इसकी खुदाई कर रहा था, सोने के छिद्रों को बाहर से देखा जा सकता था। मैंने अनुमान लगाया कि "यहां कुछ है" और फिर हमने इसे निकाल दिया और मैं अगले दिन आया और इसको नीचे धोया। यह कच्‍चा सोना बड़ी मात्रा में था। उन्होंने आरएनसी खनिजों के लिए लगभग 500 मीटर जमीने के नीचे काम किया। इस दौरान 'अविश्वसनीय' भंडार का पता लगाया।

जीवन भर की उपलब्धि 
फर्म के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क सेल्बी ने कहा कि इतने विशाल भंडार का पता लगना जीवन भर की उपलब्धि है। सेल्बी का कहना है कि इस खोज से पता चलता है कि बीटा हंट भविष्‍य में बहुत बड़ी सोने की खान बन सकती है। इस विशाल खोज के बारे में वरिष्ठ भूगर्भ विज्ञानी जैफ थानोस ने कहा, 'आप अपना पूरा जीवन लगा दें और इसे कभी भी नहीं देख पाएंगे। खान में कच्‍चा सोना की सुरक्षा के लिए सशस्त्र रक्षकों को तैनात किया जाएगा और खान की सुरक्षा बढ़ा गई है।

मैसूर की कोलार की खानों में मिलता है सोना 
भारत में विश्व का लगभग दो प्रतिशत स्वर्ण प्राप्त होता है। मैसूर की कोलार की खानों से यह सोना निकाला जाता है। कोलार में स्वर्ण की 5 खानें हैं। इन खानों से स्वर्ण पारद के साथ पारदन तथा सायनाइड विधि द्वारा निकाला जाता है।

उत्तर में सिक्किम प्रदेश में भी स्वर्ण अन्य अयस्कों के साथ मिश्रित अवस्था में मिला करता है। बिहार के मानसून और सिंहभूम जिले में सुवर्णरेखा नदी में भी स्वर्ण के कण मिले हैं। दक्षिण अमरीका के कोलंबिया प्रदेश, मैक्सिको, संयुक्त राष्ट्र अमरीका के कैलीफोर्निया तथा अलास्‍का प्रदेश, आस्ट्रेलिया तथा दक्षिण अफ्रीका स्वर्ण उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं। आश्चर्य तो यह है कि इतनी छोटी मात्रा के पदार्थ द्वारा करोड़ों मनुष्यों के भाग्य का नियंत्रण होता रहा है।

कैसे पता लगता है सोने के भंडार के बारे में 
ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं का कहना है कि यूकेलिप्टस की पत्तियों में मौजूद कणों से पता चलता है कि कई मीटर नीचे सोने का भंडार जमा है। उनका मानना है कि मुश्किल स्थानों में सोने की तलाश के लिए ताजा शोध के नतीजों से काफी फायदा  होगा। ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक और औद्योगिक शोध संगठन (सीएसआईआरओ) के भू-रासायनिक डॉक्टर मेल लिंटर्न ने बताया, हमने ऑस्ट्रेलिया में और दुनिया में दूसरे कई स्थानों में भंडार पाया है।

उन्होंने कहा कि अब हम अधिक मुश्किल भंडारों की तलाश कर रहे हैं जो नदियों की तलछट और रेत के टीलों में कई मीटर नीचे दबे हुए हैं। लिंटर्न ने बताया कि ऐसा करने के लिए इन पेड़ों के ज़रिए एक तरीका मिल रहा है। इन यूकेलिप्टस पेड़ों के आस-पास की मिट्टी में सोने के कण पाए गए हैं लेकिन शोधकर्ताओं ने साबित किया है कि पेड़ इन तत्वों को ग्रहण कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलियाई सिक्रोटॉन का इस्तेमाल करते हुए एक बड़ी मशीन के जरिए यह जांच की गई। मशीन ने इसके लिए एक्स-रे का इस्तेमाल किया। जांच में पाया गया कि कुछ पेड़ों की पत्तियों, टहनियों और छालों में सोने की मौजूदगी थी। हालांकि इस दुर्लभ धातु की मात्रा बेहद कम थी। 

अज्ञात भंडारों को खोजने का बेहतर तरीका 
डॉक्टर लिंटर्न ने बताया कि हमने एक गणना की और पाया कि एक अंगूठी बनाने के लिए जरूरी सोना पाने के लिए हमें किसी स्वर्ण भंडार के ऊपर 500 पेड़ उगाने होंगे। हालांकि कणों की मौजूदगी से 30 मीटर से अधिक गहराई पर दफन एक बड़े भंडार के बारे में पता चलता है। डॉक्टर लिंटर्न का कहना है कि हमारा मानना है कि पेड़ हाइड्रोलिक पंप की तरह बर्ताव कर रहे हैं।

वो जीवन के लिए जड़ों से पानी ले रहे हैं और ऐसा करने के दौरान वो अपने नाड़ी तंत्र के जरिए कम मात्रा में घुलनशील सोने के कण ग्रहण करते हैं, जो पत्तियों तक पहुंच जाता है। फिलहाल यह धातु पृथ्वी की सतह से ऊपर निकली चट्टानों में पाई जाती है, जहां अयस्क सतह पर दिखाई देते हैं या फिर सघन खोज के तहत ड्रिलिंग के जरिए इसे खोजा जाता है। 

 शोधकर्ताओं का कहना है कि पेड़-पौधों के विश्लेषण से सोने के अज्ञात भंडारों को खोजने का बेहतर तरीका पाया जा सकता है। डॉक्टर लिंटर्न के मुताबिक़ इस तरीके से स्वर्ण भंडारों की खोज में आने वाली लागत में कमी आएगी और साथ ही पर्यावरण को क्षति भी कम होगी।शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल दुनिया के दूसरे हिस्सों में लोहा, तांबा और लेड जैसी धातुओं की खोज के लिए किया जा सकता है। 

 

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