तालिबानी सजा की वापसी : सरेआम किडनैपर्स को मारी गोली, चौराहे पर घंटों तक लटकाया शव

अगस्त से अफगानिस्तान पर काबिज तालिबानियों ने अफगानिस्तान में अपनी तरह से सजा का दौर शुरू हो चुका है। हेरात शहर के एक प्रत्यक्षदर्शी वजीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि तालिबान की कथित पुलिस चार शवों को चौराहे पर लेकर आई और एक को क्रेन के सहारे टांग दिया।

Monika MinalSun, 26 Sep 2021 02:06 AM (IST)
तालिबान ने पार की हद : हेरात के सिटी स्कवायर में मृतकों को लटकाया

 नई दिल्ली, आइएएनएस। अफगानिस्तान में तालिबानी सजा की वापसी का सबूत हेरात में शनिवार को सामने आया। दरअसल तालिबानी पुलिस ने लोगों के बीच खौफ कायम करने के लिए  अपहरण के चार आरोपियों को सरेआम गोली मार हत्या कर दी और शहर के विभिन्न चौराहों पर मृतक के शवों को लटका कर छोड़ दिया।

क्रेन के सहारे घंटो तक टंगा रहा शव 

पश्चिमी अफगानिस्तान के हेरात प्रांत के विभिन्न चौराहों पर तालिबानी पुलिस ने शहर के मुख्य चौराहे पर पहले चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी और फिर चारों शवों को क्रेन के सहारे सड़क के बीच चौराहे पर घंटों तक लटकाए रखा। बता दें कि इन चारों पर अपहरण का आरोप था। एपी के अनुसार, हेरात शहर के एक प्रत्यक्षदर्शी वजीर अहमद सिद्दीकी ने बताया कि तालिबान की कथित पुलिस चार शवों को चौराहे पर लेकर आई और एक को क्रेन के सहारे टांग दिया गया। यह शव घंटों तक यूं ही हवा में लटका रहा। मृतक के गले में एक तख्ती भी लटकी हुई थी। इसपर पश्तो भाषा में कुछ लिखा हुआ था। बाकी के तीन शवों को तालिबान ने हेरात के दूसरे चौराहे पर ले जाकर लटकाया।

दरअसल एक बिजनेसमैन व उसके बेटे को किडनैप किया गया था। हेरात के डिप्टी गवर्नर मोलवी शेर अहमद एमार (Maulwai Shair Ahmad Emar) ने बताया कि तालिबानी लड़ाके किडनैपर्स का पीछा कर रहे थे और इसी क्रम में दोनों के बीच झड़प हुई और सभी आरोपी मारे गए। इस तरह का अपराध दोबारा न हो इसलिए तालिबानियों ने सार्वजनिक तौर पर इतनी निर्मम सजा दी।

ऐसी सजा आगे भी जारी रखेगा तालिबान  

इस तरह की कार्रवाई को लेकर तालिबान का कहना है कि लोगों के जेहन में गलत काम के लिए डर और खौफ पैदा करने के लिए ऐसी सजा जरूरी है। तालिबान ऐसी सजाएं आगे भी जारी रखेगा, ताकि गलत काम करने से पहले लोग हजार बार सोचे। वजीर ने बताया कि गलत काम के लिए सजा देनी चाहिए। लेकिन इस तरह का अमानवीय तरीका इंसनियत के लिए सही नहीं है। सिद्दीकी कहते हैं, अफगानिस्तान में एक बार फिर से वहीं 90 का दशक लौट आया है, जब लोग तालिबान के डर से कांपते थे।

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