सूडान में सैन्य तख्तापलट के बाद भारी बवाल, प्रदर्शनकारी भीड़ पर गोलीबारी में तीन की मौत, जानें ताजा अपडेट

सूडान में सेना ने तख्तापलट कर आपातकाल की घोषणा कर दी है। देश के अंतरिम प्रधानमंत्री और सरकार की कैबिनेट के कमोबेश सभी सदस्यों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। सुुरक्षा बलों की फायरिंग में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है...

Krishna Bihari SinghMon, 25 Oct 2021 10:52 PM (IST)
सूडान में सेना ने तख्तापलट कर आपातकाल की घोषणा कर दी है।

काइरो, एपी। सूडान में सेना ने तख्तापलट कर दिया है और सेना के सबसे प्रमुख जनरल ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी है। इससे पहले देश के अंतरिम प्रधानमंत्री और सरकार की कैबिनेट के कमोबेश सभी सदस्यों को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया। तख्तापलट के बाद बड़ी संख्‍या में लोगों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध बढ़ता देख सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है। समाचार एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक 80 लोग घायल हो गए हैं।

लोगों में आक्रोश, सड़कों पर उमड़ा हुजूम

देश की मुख्य लोकतंत्र समर्थक संगठन और सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी ने सूडानी जनता से सड़कों पर उतरकर सैन्य तख्तापलट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की। इसके बाद हजारों की संख्‍या में लोग खारतुम और ओमदुरमन शहरों में सड़कों पर उतर आए और विरोध-प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के वीडियो में लोगों को सड़कों को ब्लाक करते देखा जा सकता है। सुरक्षा बलों के टीयर गैस छोड़ने पर प्रदर्शनकारियों ने टायरों में आग लगा दी। विरोध बढ़ता देख सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की जिसमें कम से तीन लोगों की मौत हो गई है।

सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा 

सूचना मंत्रालय के फेसबुक पेज के अनुसार सूडान में बड़े पैमाने पर इंटरनेट स्लो कर दिया गया है। सुरक्षा बलों ने पुलों को बंद कर दिया है। प्रधानमंत्री अब्दल्ला हमदोक कहां हैं यह अभी तक किसी को पता नहीं है। देश का सरकारी चैनल फिलहाल टीवी पर देशभक्ति का परंपरागत संगीत बजा रहा है और नाइल नदी की तस्वीरें दिखाई जा रही हैं।

टेलीविजन पर किया एलान 

टेलीविजन पर दिए संबोधन में सूडानी सेना के जनरल अब्देल-फताह बुरहान ने घोषणा की है कि देश की सत्तारूढ़ संप्रभु परिषद को भंग किया जा रहा है। साथ ही प्रधानमंत्री अब्दल्ला हमदोक के नेतृत्व वाली सरकार को भी खत्म कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक धड़ों में झगड़ों को देखते हुए सेना ने सत्ता की कमान अपने हाथ में ले ली है। उन्होंने कहा कि वह शपथ लेते हैं कि लोकतांत्रिक सरकार के बदलाव की प्रक्रिया को हम पूरा कराएंगे। चुनाव होने तक उनकी एक नई टेक्नोक्रेट सरकार रहेगी।

दो साल ही रहा लोकतंत्र

सूडान में तख्तापलट इस देश के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। ब्रिटिश शासन से 1956 में आजादी मिलने के बाद करीब आठ बार तख्तापलट हो चुका है। सिर्फ दो साल पहले वर्ष 2019 में यह देश लंबे समय तक शासक रहे ओमर-अल-बशीर को जनता ने विरोध-प्रदर्शन कर हटाया था और सूडान में लोकतंत्र की स्थापना हुई थी। लेकिन अब महज यह दो साल के बाद ही फिर से सैन्य शासन के शिकंजे में जा चुका है। 75 वर्षीय सैन्य शासक ओमर-अल-बशीर को तब जनता ने आर्थिक दुगर्ति के कारण सत्ता से हटवाया था।

साल 2022 में होना था चुनाव

ओमर-अल-बशीर ने सूडान पर 1989 से शासन शुरू किया था लेकिन उनकी गलत आर्थिक नीतियों का विरोध जनता ने खुलकर करना वर्ष 2018 में शुरू किया था लेकिन वर्ष 2019 से सूडान में 11 सदस्यीय एक संप्रभु परिषद सरकार चला रही थी जिसमें सेना और नागरिक पक्ष के नेता मौजूद थे। इस सरकार का मकसद वर्ष 2022 में चुनाव करवा कर एक पूर्णरूपेण लोकतांत्रिक सरकार लाना था।

सितंबर में भी हुई थी नाकाम कोशिश

सोमवार की शुरुआत में ही सूडान के लोकतांत्रिक नेताओं और सैन्य अफसरों के बीच तनातनी शुरू हो गई। इससे पहले सितंबर में भी तख्तापलट की एक नाकाम कोशिश हुई थी जिससे सरकार और सैन्य प्रशासन में दरार पड़ने लगी थी।

इस्लामिक शासन चाहते हैं कट्टरपंथी

कट्टरपंथी इस्लामिक वहां पर सैन्य शासन चाहते हैं। वह उन लोगों के खिलाफ सैन्य सरकार चाहते हैं जिन्होंने अल-बशर में सड़कों पर प्रदर्शन किया था। सूचना मंत्रालय का कहना है कि हमदोक को किसी अज्ञात स्थल पर हिरासत में रखा गया है। इसके अलावा, सरकार के कम से कम पांच अफसरों को भी हिरासत में लिया गया है।

संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने जताई नाराजगी

दूसरी ओर सूडान में मौजूद संयुक्त राष्ट्र अभियान ने तख्तापलट पर अपनी नाराजगी जताई है। साथ ही लोकतांत्रिक प्रणालियों को कमजोर किए जाने भी आपत्ति भी जताई है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ मिलकर सूडान में हुए तख्तापलट पर चिंता जताई है। यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख जोसेफ बोरेल ने ट्वीट करके कहा कि उत्तर पूर्वी अफ्रीकी देश मौजूदा हालात से बेहद चिंतित है। वहीं, अफ्रीका में अमेरिकी में दूत जेफरी फेल्टमैन ने कहा कि सरकार के स्वरूप में कोई भी बदलाव होने पर वह नजर रखेंगे। 

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