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गृहयुद्ध में लापता 20 हजार लोगों की होगी जांच, श्रीलंका के राष्ट्रपति ने दिया आदेश

कोलंबो, प्रेट्र। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए 20 हजार से ज्यादा लोगों के बारे में जांच चाहते हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने बुधवार को यह स्पष्टीकरण राजपक्षे के उस बयान के बाद जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि लापता लोगों की मौत हो गई।

विद्रोहियों और सरकार के बीच तीन दशक तक चला गृहयुद्ध

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच करीब तीन दशक तक गृहयुद्ध चला था। 2009 में कड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद यह युद्ध खत्म हुआ था। इस कार्रवाई की कमान वर्तमान राष्ट्रपति और तत्कालीन रक्षा मंत्री गोतबाया के ही हाथ में थी। उन पर युद्ध अपराध जैसे गंभीर आरोप भी लगे थे। इस गृहयुद्ध में करीब एक लाख लोग मारे गए थे।

राजपक्षे ने पहले कही थी लोगों के मरने की बात

गोतबाया ने हाल में संयुक्त राष्ट्र की रेजिडेंट कोआर्डिनेटर हाना सिंगर से मुलाकात के दौरान कहा था कि लापता लोगों के बारे में आवश्यक जांच के बाद उनके परिजनों को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, राजपक्षे ने संयुक्त राष्ट्र की अधिकारी को बताया था कि वह मामले की जांच चाहते हैं। उनका कहना था कि जो लोग इस लड़ाई में मारे गए उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता।

सेना से ताल्लुक रखने वाले चार हजार कर्मचारी भी लापता

वर्ष 2009 में गृहयुद्ध की समाप्ति पर सरकार ने जनगणना कराई थी। उस समय इस बात का पता चला था कि ज्यादातर लापता लोगों को लिट्टे ने अपनी सेना में शामिल कर लिया था। इसकी पुष्टि उनके परिजनों ने भी की थी। लेकिन लड़ाई के बाद उनका कोई पता नहीं चला। सच्चाई यह है कि लड़ाई के दौरान इन लोगों की मौत हो गई थी। सेना से ताल्लुक रखने वाले चार हजार कर्मचारी भी लापता हैं। इन लोगों की भी लड़ाई के दौरान मौत हो गई लेकिन उनके शव बरामद नहीं हुए।

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