सियासी संकट के बीच केपी शर्मा ओली ने बुलाई सुरक्षा परिषद की बैठक, ये मंत्री हो सकते हैं शामिल

सियासी संकट के बीच केपी शर्मा ओली ने बुलाई सुरक्षा परिषद की बैठक

नेपाल में सियासी संकट के बीच कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आज सुबह सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई है। बता दें कि पिछले साल संसद भंग करने के अपने फैसले के बाद बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता के बीच यह बैठक आयोजित की गई है।

Pooja SinghTue, 23 Feb 2021 10:53 AM (IST)

काठमांडू, एएनआइ। नेपाल में सियासी संकट के बीच कार्यवाहक प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (Prime Minister KP Sharma Oli) ने आज सुबह सुरक्षा परिषद की बैठक (Security Council meeting) बुलाई है। बता दें कि पिछले साल संसद को भंग करने के अपने फैसले के बाद नेपाल में बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता के बीच यह बैठक आयोजित की गई है। बालुवतार (Baluwatar) में अपने आधिकारिक निवास पर बुलाई गई इस बैठक में विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली, वित्त मंत्री बिष्णु पोडेल, गृह मंत्री राम बहादुर थापा और थल सेनाध्यक्ष पूर्ण चंद्र शामिल हो सकते हैं। 

सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष भी हैं ओली

रक्षा सचिव रेशमी राज पांडे ने टेलीफोन पर न्यूज एजेंसी एएनआइ को बताया कि यह एक नियमित बैठक है जो हमेशा एक निश्चित समय के बाद आयोजित की जाती है। बता दें कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री ओली सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष भी हैं।  

राष्ट्रीय हितों से संबंधित विषय पर होगी चर्चा

बता दें कि इस बैठक में राष्ट्रीय हितों से संबंधित विषय पर चर्चा की जाती है। राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (National Security Council) के लिए एक संवैधानिक प्रावधान है, जिसके मुताबिक, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक की जाती है, जिसमें राष्ट्रीय हित, सुरक्षा और रक्षा से संबंधित नीतियों को तैयार किया जाता है। इसके साथ ही नेपाल सेना के नियंत्रण के लिए सरकार को सिफारिश की जाती है। 

21 दिसंबर 2020 को आखिरी बैठक हुई थी आयोजित

गौरतलब है कि आखिरी बार ये बैठक पिछले साल 21 दिसंबर को आयोजित हुई थी। इसके एक दिन पहले ओली ने संसद को भंग करने की सिफारिश की थी। हालांकि, संसद को निर्धारित समय से दो साल पहले ही भंग कर दिया गया था और नए सिरे से चुनाव कराने की घोषणा की गई थी। 

सुरक्षा परिषद की बैठक का आयोजन उस समय किया गया है जब जब नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने संसद को भंग करने के लिए ओली के कदम को चुनौती देने वाले एक दर्जन से अधिक मामलों में अपना फैसला सुनाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि ओली ने संसद को भंग करने की सिफारिश को लेकर राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी के पास पहुंचे थे। इसके बाद राष्ट्रपति ने उसी दिन ही इसे मंजूरी दे दी और संसद को भंग कर दिया, जिसके बाद से ही नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता है।

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