डब्ल्यूएचओ ने एयर क्‍वालिटी के लिए जारी की नई गाइड लाइन, जीवाश्म ईंधन से होने वाली मौतों में होगी कटौती

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को 2005 के बाद से पहला एयर क्‍वालिटी गाइड लाइन को जारी किया है जिसका उद्देश्य हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बनने वाले प्रमुख प्रदूषकों से होने वाली मौतों को कम करना है।

Arun Kumar SinghWed, 22 Sep 2021 07:30 PM (IST)
डब्ल्यूएचओ ने को 2005 के बाद से पहला एयर क्‍वालिटी गाइड लाइन को जारी किया है,

 जिनेवा, रायटर्स। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को 2005 के बाद से पहली एयर क्‍वालिटी गाइड लाइन जारी की है, जिसका उद्देश्य हृदय और श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण बनने वाले प्रमुख प्रदूषकों से होने वाली मौतों को कम करना है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने अपने 194 सदस्य देशों को सलाह देते हुए कई प्रदूषकों के लिए सिफारिश के अधिकतम स्तर को घटा दिया है, जिसमें पार्टिकुलेट मैटर और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड शामिल हैं, जो दोनों जीवाश्म ईंधन उत्सर्जन में पाए जाते हैं।

एयर क्‍वालिटी दिशा-निर्देशों में कहा गया कि वायु प्रदूषण जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़े पर्यावरणीय खतरों में से एक है। पहले की तुलना में कम सांद्रता पर डब्ल्यूएचओ ने मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण से होने वाले नुकसान के स्पष्ट सबूत का हवाला दिया। डब्ल्यूएचओ ने लगभग सभी एयर क्‍वालिटी गाइड लाइन के स्तरों को नीचे की ओर समायोजित किया है। यह चेतावनी देते हुए कहा कि नए एयर क्‍वालिटी गाइड लाइन के स्तर से अधिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण जोखिम से जुड़ा है। साथ ही उनका पालन करने से लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, व्‍यापक और घरेलू वायु प्रदूषण की और भी कम सांद्रता के लंबे समय तक संपर्क में रहने से फेफड़े के कैंसर, हृदय रोग और स्ट्रोक सहित बीमारियां हो सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप हर साल अनुमानित 70 लाख लोगों की समय से पहले मौतें होती हैं। यह वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारी के बोझ को अन्य प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य जोखिमों जैसे कि अस्वास्थ्यकर आहार और तंबाकू धूम्रपान के बराबर असर होता है। गाइड लाइन में कहा गया है कि कम और मध्यम आय वाले देशों में रहने वाले लोग शहरीकरण और आर्थिक विकास के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, जो जीवाश्म ईंधन को जलाने पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं।

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) के संपर्क को कम करना, फेफड़ों में गहराई से प्रवेश करने और रक्‍तप्रवाह में प्रवेश करने में सक्षम होना प्राथमिकता है। ये मुख्य रूप से परिवहन, ऊर्जा, घरों, उद्योग और कृषि सहित क्षेत्रों में ईंधन के दहन से पैदा होते हैं।

नई गाइलाइन के तहत, डब्ल्यूएचओ ने औसत वार्षिक पीएम 2.5 स्तर के लिए सिफारिश की सीमा को 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से आधा करके पांच कर दिया। इसने पीएम 10 के लिए सिफारिश की सीमा को 20 माइक्रोग्राम से घटाकर 15 कर दिया है। गाइलाइन में कहा गया कि यदि वर्तमान वायु प्रदूषण के स्तर को नवीनतम गाइडलाइन में प्रस्तावित लोगों तक कम कर दिया गया था, इससे पीएम 2.5 से जुड़ी लगभग 80 फीसद मौतों को दुनिया में टाला जा सकता है। यह 2.5 माइक्रोन व्यास के कण पदार्थ का जिक्र किया गया है।

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