म्यांमार की अदालत ने आंग सान सू की मुकदमे में पहला फैसला टला

सैन्य शासित म्यांमार की एक अदालत ने मंगलवार को देश की अपदस्थ नेता आंग सान सू की के मुकदमे का पहला फैसला 6 दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है। कार्यवाही से परिचित एक सूत्र ने इस बात की जानकारी दी।

Ashisha RajputPublish:Tue, 30 Nov 2021 04:53 PM (IST) Updated:Tue, 30 Nov 2021 05:01 PM (IST)
म्यांमार की अदालत ने आंग सान सू की मुकदमे में पहला फैसला टला
म्यांमार की अदालत ने आंग सान सू की मुकदमे में पहला फैसला टला

म्यांमार, रायटर। सैन्य शासित म्यांमार की एक अदालत ने मंगलवार को देश की अपदस्थ नेता आंग सान सू की के मुकदमे का पहला फैसला 6 दिसंबर तक के लिए टाल दिया गया है, कार्यवाही से परिचित एक सूत्र ने इस बात की जानकारी दी। मंगलवार को अदालत ने प्राकृतिक आपदा कानून के तहत कोविड​​​​-19 प्रोटोकॉल के उल्लंघन और अन्य आरोपों सहित लगभग एक दर्जन मामलों में, सू की पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। यही नहीं सू की के खिलाफ भ्रष्टाचार और एक आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन का भी आरोप है।

76 वर्षीय सू की को 1 फरवरी से हिरासत में लिया गया था, जब उनकी सरकार को जनरलों ने हटा दिया था, जिसके बाद सू की, कि सरकार ही नहीं बल्कि म्यांमार का संक्षिप्त लोकतांत्रिक अंतराल भी समाप्त हो गया था। एक स्थानीय निगरानी समूह के अनुसार, तख्तापलट के बाद जब लोगों में इसके इसके खिलाफ आवाज उठाई तो असंतोष पर कार्रवाई में 1,200 से अधिक लोग मारे गए हैं और 10,000 से अधिक गिरफ्तार किए गए हैं।

हमेशा से मुश्किलों का सामना करना पड़ा सू की को

म्यांमार में लोकतांत्रिक लड़ाई को लेकर अक्सर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, आंग सान सू की को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। उन्हें सेना के खिलाफ उकसाने का दोषी पाए जाने पर तीन साल की जेल का सामना करना पड़ा है, यही नहीं बल्कि सू की के खिलाफ कई ऐसे आरोप है, जो उन्हें लम्बे समय तक के लिए जेल में डाल सकते है।

पत्रकारों पर लगाया गया प्रतिबंध

म्यांमार के सैन्य शासन में पत्रकरों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। आपको बता दे कि पत्रकारों को सेना द्वारा निर्मित राजधानी नैपीडॉ में विशेष अदालत में कार्यवाही करने से रोक दिया गया है। यही नहीं पत्रकारों को सू की के वकीलों को हाल ही मीडिया से बातचीत करने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

देश में सैन्य शासन में सजा का सिलसिला जोरों पर है। आपको बता दें कि इस महीने की शुरुआत में एक पूर्व मुख्यमंत्री को 75 साल जेल की सजा सुनाई गई थी, जबकि सू की के एक करीबी को 20 साल की जेल की सजा हुई थी।