37 सालों बाद भगवान की मूर्ति आई वापस नेपाल, अमेरिका के म्यूजियम में थी मौजूद

37 सालों बाद भगवान की मूर्ति आई वापस नेपाल

वर्ष 1984 में नेपाल स्थित पाटन के पटको टोले में धर्मस्थल से गायब भगवान लक्ष्मी नारायण की मूर्ति अपने स्थान पर वापस आ गई है। दरअसल यह डलास के एक संग्रहालय में थी। इसके लिए नेपाल ने अमेरिका को सबूत दिया।

Monika MinalFri, 16 Apr 2021 09:48 AM (IST)

काठमांडू, एएनआइ। नेपाल के एक मंदिर से  वर्ष 1984 में गायब भगवान की मूर्ति अमेरिका के संग्रहालय में रखी हुई थी जिसकी वापसी हो गई है। इसके लिए नेपाल की ओर से अमेरिकी सरकार के पास अपील की गई थी और इसका सबूत भी पेश किया गया था। यह जानकारी नेपाल पर्यटन मंत्रालय के सचिव वाइ पी कोइराला (YP Koirala) ने दी। 

उन्होंने बताया, 'वर्ष 1984 में नेपाल स्थित पाटन के पटको टोले में धर्मस्थल से गायब भगवान लक्ष्मी नारायण की मूर्ति अपने स्थान पर वापस आ गई है। दरअसल यह डलास के एक संग्रहालय में थी। हमने उन्हें इसका सबूत पेश किया। इसके बाद अमेरिका की सरकार इसकी वापसी को लेकर सहमत हुई।' 

नेपाल द्वारा अमेरिका को यह सबूत पेश किया गया कि भगवान की यह मूर्ति उनकी है तब जाकर पिछले माह अमेरिका ने नेपाली दूतावास को यह सौंपा। नेपाल कल्चर सेक्रेटरी यादव प्रसाद कोइराला ने बताया, 'डलास संग्रहालय में रखी गई यह मूर्ति के लिए हमारी अमेरिकी अधिकारियों के साथ चार बार बैठक हुई और तब जाकर हमारे सबूतों पर उन्होंने मुहर लगाई और मूर्ति को आधिकारिक तौर पर सौंप दिया।' अमेरिका की ओर से FBI ने 6 मार्च को वाशिंगटन स्थित नेपाली दूतावास को सौंपा गया। इसके बाद कागजातों की प्रक्रिया पूरा करने में कुछ वक्त लगा। उल्लेखनीय है कि मंदिर से लापता मूर्ति के जगह स्थानीय श्रद्धालुओं ने वैसी ही मूर्ति बनवाकर स्थापित करवाया और पूजा शुरू की।

बता दें कि नेपाल में भगवान के इस मूर्ति की पूजा करीब 800 सालों तक हुई जिसके बाद यह गायब हो गई थी।वर्ष 1990 में 12वीं सदी की यह मूर्ति जिसे वासदेव कमला के नाम से भी जानते हैं न्यूयार्क के सोथबे नीलामी घर में देखी गई। जिसके बाद यह फिर से लापता हो गई और गूगल इमेज सर्च के जरिए अमेरिकी आर्टिस्ट ने इसका पता लगाया कि ये डलास म्यूजियम ऑफ आर्ट में है। 

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से जुड़ी प्रमुख जानकारियों और आंकड़ों के लिए क्लिक करें।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.